कोलकाता: टी20 वर्ल्ड कप के बहिष्कार के फैसले ने बांग्लादेश क्रिकेट को गहरे संकट में डाल दिया है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी स्थिति मजबूत करने की बजाय बांग्लादेश अब अलग-थलग पड़ता नजर आ रहा है। क्रिकेट जगत में इस फैसले की तुलना उस कालिदास से की जा रही है, जिसने खुद उसी डाल को काट दिया जिस पर वह बैठा था।
भारत पर दबाव बनाने की रणनीति के तहत लिया गया वर्ल्ड कप बॉयकॉट का फैसला अब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के लिए उल्टा पड़ता दिख रहा है। शुक्रवार को BCB ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) को पत्र लिखकर मामले को डिसीजन रेजोल्यूशन कमेटी (DRC) को भेजने की मांग की थी, लेकिन सूत्रों के मुताबिक ICC को इसमें हस्तक्षेप की कोई ठोस वजह नहीं दिख रही। ऐसे में बांग्लादेश की अपील खारिज होने की संभावना जताई जा रही है।
जैसे ही यह स्पष्ट हुआ कि बांग्लादेश वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं लेगा, देश के भीतर नाराजगी तेज हो गई। आम चुनावों से पहले मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर भी दबाव बढ़ा है। सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा मीडिया तक, 22 जनवरी को लिया गया यह फैसला बांग्लादेश क्रिकेट के इतिहास के सबसे खराब फैसलों में गिना जा रहा है।
सरकार के खेल सलाहकार आसिफ नजरुल और BCB चेयरमैन अमीनुल इस्लाम आलोचनाओं के घेरे में हैं। दोनों ने शुरुआत में दावा किया था कि ICC को वेन्यू बदलने के लिए राजी कर लिया जाएगा और बांग्लादेश के मैच श्रीलंका में कराए जाएंगे। लेकिन ICC बोर्ड बैठक में पाकिस्तान को छोड़कर कोई भी देश बांग्लादेश के समर्थन में सामने नहीं आया। यहां तक कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन मोहसिन नकवी की चुप्पी ने भी बांग्लादेश की उम्मीदों को झटका दिया।
इस पूरे घटनाक्रम में बांग्लादेशी जनता का मानना है कि BCB बिना अपनी ताकत का आकलन किए एक बड़े संगठन से टकराने चला गया। पूर्व कप्तान तमीम इकबाल ने जब चेतावनी दी कि वर्ल्ड कप के बहिष्कार से पहले सभी पहलुओं पर विचार जरूरी है, तो उन्हें ‘इंडियन एजेंट’ कहकर निशाना बनाया गया। इस बयान के बाद जबरदस्त विरोध हुआ और अंततः BCB को फाइनेंस कमिटी के चेयरमैन नजमुल इस्लाम को हटाना पड़ा।
वित्तीय नुकसान की तस्वीर और भी डराने वाली है। ICC से मिलने वाला सालाना डिविडेंड, जो भारतीय मुद्रा में करीब 250 करोड़ रुपये है, वर्ल्ड कप में भाग न लेने की वजह से खतरे में पड़ गया है। सहायक मदों को जोड़ें तो यह नुकसान 300 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, भागीदारी शुल्क के रूप में लगभग 40 मिलियन रुपया और संभावित रूप से 250 मिलियन रुपये के जुर्माने की आशंका भी जताई जा रही है।
क्रिकेटरों की नाराजगी भी साफ झलक रही है। हालांकि लिटन दास, मुस्तफिजुर रहमान और मेहदी हसन मिराज ने सार्वजनिक रूप से बयान नहीं दिया है, लेकिन अंदरूनी तौर पर खिलाड़ियों में गुस्सा है। अंतिम फैसले से पहले बुलाई गई बैठक में खिलाड़ियों की राय नहीं ली गई, जबकि अधिकांश खिलाड़ी वर्ल्ड कप में खेलने के पक्ष में थे।
भारत-बांग्लादेश क्रिकेट रिश्तों पर भी इसका असर पड़ता दिख रहा है। भारत को अगले सितंबर में सीमित ओवरों की सीरीज के लिए बांग्लादेश का दौरा करना था। अगर यह दौरा रद्द होता है तो BCB को स्पॉन्सरशिप और ब्रॉडकास्टिंग के मोर्चे पर भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। आगे चलकर 2027 एशिया कप और 2031 वनडे वर्ल्ड कप की मेजबानी पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
कुल मिलाकर वर्ल्ड कप बॉयकॉट का फैसला बांग्लादेश क्रिकेट के लिए राजनीतिक, आर्थिक और खेल-तीनों मोर्चों पर एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है, जिसकी कीमत खिलाड़ियों और प्रशंसकों को चुकानी पड़ सकती है।