नई दिल्ली: भारत की अंडर-19 क्रिकेट टीम ने 2026 विश्व कप के फाइनल में इंग्लैंड को 100 रन से हराकर एक और ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इस शानदार जीत में एक नाम जो सबसे अधिक उभर कर सामने आया, वह था एरोन जार्ज का। एरोन ने इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय युवा क्रिकेट टीम के इस चमकते सितारे का परिवार हमेशा उनकी क्रिकेट यात्रा में उनके साथ खड़ा रहा।
एक बेटे की क्रिकेट यात्रा: परिवार का सपना
एरोन जार्ज के पिता, ईसो वर्गीज, ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा, "जब से एरोन ने क्रिकेट में दिलचस्पी दिखानी शुरू की थी, हमने उसके सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव मदद की। वह हमेशा से भारत के लिए खेलने का सपना देखता था। आज वह उस सपने को साकार कर चुका है। हमें अपने बेटे पर गर्व है।"
प्रीथी वर्गीज, एरोन की मां भी इस सफलता पर खुशी से भर उठी हैं। उन्होंने कहा, "एरोन ने कड़ी मेहनत की है और हम हमेशा उसकी मेहनत के साथ खड़े रहे। हमें गर्व है कि वह आज विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा बना। उसका भविष्य उज्जवल रहे।"
सक्रिय क्रिकेट करियर की शुरुआत
एरोन का क्रिकेट से प्यार बचपन में ही शुरू हो गया था। उसकी दादी-नानी ने बताया, "वह जब सिर्फ तीन साल का था, तब से क्रिकेट में रुचि दिखाने लगा था। उसके पिता ने उसे प्रोत्साहित किया और उसे कोचिंग दिलवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।"
एरोन की शुरुआती क्रिकेट यात्रा की वजह से उसने जल्द ही सबका ध्यान आकर्षित किया। बहुत तेजी से उभरते हुए वह क्रिकेट सितारे के रूप में पहचान बनाने लगा।
हैदराबाद से भारतीय टीम तक: अरीयन की संघर्षपूर्ण यात्रा
एरोन जार्ज की सफलता का सफर सिर्फ भारतीय अंडर-19 टीम तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने हैदराबाद की कप्तानी करते हुए 2024 के विनू मांकड ट्रॉफी में अहम भूमिका निभाई। इस जीत ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिलाई। उनके दादा ने कहा, "हैदराबाद ने वर्षों बाद विनू मांकड ट्रॉफी जीती और एरोन उसकी कप्तानी कर रहा था। अब वह अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा है। यह किसी सपने से कम नहीं है।"
भारत का शानदार प्रदर्शन: विश्व कप जीतने की राह
भारत ने 2026 के अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप के फाइनल में इंग्लैंड को 100 रन से हराकर एक नई ऐतिहासिक जीत दर्ज की। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 411/9 का विशाल स्कोर खड़ा किया। इसमें वैभव सूर्यवंशी की धमाकेदार 175 रन की पारी ने सभी का ध्यान खींचा। सूर्यवंशी ने महज 80 गेंदों में यह पारी खेली। इसमें 15 चौके और 15 छक्के शामिल थे। उनकी पारी ने भारत को एक शानदार शुरुआत दी और इंग्लैंड के लिए लक्ष्य को असंभव बना दिया।
इंग्लैंड की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने ढेर हो गई और भारत ने उन्हें 311 रन पर आलआउट कर दिया। भारत ने इस मैच में कुल 31 छक्के मारे, जो एक नया रिकॉर्ड बन गया।
एरोन जार्ज का योगदान
एरोन जार्ज ने पूरे टूर्नामेंट में महत्वपूर्ण पारियां खेलीं। इनमें से सेमीफाइनल में अफगानिस्तान के खिलाफ 115 रन की पारी ने भारतीय टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 170 रन बनाये। उनका औसत 34.00 रहा। उनकी शांत और स्थिर बैटिंग ने टीम के लिए मजबूती प्रदान की और उन्हें भारतीय टीम का अहम खिलाड़ी बना दिया।
एरोन जार्ज का यह विश्व कप जीतना सिर्फ उनके लिए नहीं बल्कि उनके परिवार के लिए भी गर्व का पल है। उनकी यात्रा इस बात का उदाहरण है कि अगर मन में सच्चा सपना हो और मेहनत की जाए तो किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है। भारतीय क्रिकेट को लेकर उम्मीदें अब और भी बढ़ गई हैं। एरोन जार्ज जैसे युवा खिलाड़ियों के नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट का भविष्य और भी शानदार नजर आ रहा है।