नयी दिल्लीः पश्चिम एशिया की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। हमले और जवाबी हमले जारी हैं। ऐसे माहौल में रविवार देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन किया। उन्होंने मौजूदा हालात पर चिंता व्यक्त की और संघर्ष को जल्द समाप्त करने की बात कही। उल्लेखनीय है कि नेतन्याहू को फोन करने से कुछ समय पहले मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से भी बातचीत की थी।
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए मोदी ने बताया कि उन्होंने नेतन्याहू से पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने लिखा कि लगातार हो रही घटनाओं को लेकर भारत चिंतित है। उन्होंने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही और स्पष्ट रूप से कहा कि “युद्ध या संघर्ष जल्द से जल्द बंद होना चाहिए।”
तमिलनाडु दौरे से नई दिल्ली लौटने के बाद प्रधानमंत्री ने सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में हिस्सा लिया। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी उपस्थित थे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए। बैठक में मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें वापस लाने की योजना पर चर्चा की गई। जानकारी के अनुसार, ईरान में लगभग 10 हजार, इज़राइल में 40 हजार से अधिक और पूरे पश्चिम एशिया तथा खाड़ी क्षेत्र में लगभग 90 लाख भारतीय नागरिक रहते हैं।
बैठक में हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद किए जाने की स्थिति पर भी चर्चा हुई। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है। ऐसे में यदि यह मार्ग बाधित होता है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। साथ ही रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के दाम पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
नेतन्याहू से बातचीत से पहले मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति से भी बात की। उन्होंने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की और अमीरात में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रपति का धन्यवाद भी किया।