नई दिल्ली/ कोलकाता : सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई के साथ-साथ देश के चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर ममता बनर्जी राजनीतिक संघर्ष को भी तेज करना चाहती हैं। इसी क्रम में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए इम्पीचमेंट यानी महाभियोग प्रस्ताव लाने की बात बात कही है। यह सिर्फ चेतावनी तक सीमित नहीं है। इम्पीचमेंट के लिए आवश्यक संख्या जुटाने की कोशिश में भी बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी पूरी तरह जुट गई है।
बुधवार को तृणमूल सूत्रों के अनुसार, ज्ञानेश कुमार के इम्पीचमेंट के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, डीएमके और आरजेडी के साथ प्रारंभिक बातचीत हो चुकी है। कांग्रेस के साथ भी संवाद शुरू हो गया है।
इस बातचीत से कांग्रेस ने भी इनकार नहीं किया है। बल्कि CEC को हटाने के सवाल पर अन्य विपक्षी दलों के साथ एकजुट होकर चलने के संकेत दिए हैं। बुधवार को संसद भवन परिसर में कांग्रेस की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह मुद्दा अब केवल किसी एक राज्य की शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता के एक अहम निर्णय का रूप ले सकता है।
मीडिया से बातचीत में कांग्रेस के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस पहले ही कांग्रेस से संपर्क कर चुकी है और इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच चर्चा जारी है। उनके शब्दों में, “तृणमूल ने जो मुद्दा उठाया है, वह बेहद महत्वपूर्ण है और कांग्रेस इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रूप से विचार कर रही है।”
कांग्रेस नेतृत्व के इस रुख से संकेत मिलता है कि चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्ष की नाराज़गी धीरे-धीरे एक संगठित राजनीतिक रुख में बदल सकती है। हालांकि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस विषय पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने साफ कहा, “जनता से जुड़े किसी भी मुद्दे पर हम दीदी के साथ हैं।” वहीं तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने स्पष्ट किया कि बहुत जल्द मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इम्पीचमेंट मोशन लाया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी की आंतरिक रणनीति इस समय मीडिया के सामने साझा नहीं की जा सकती।
संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने हेतु कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं और इसे पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए। इसी कारण तृणमूल कांग्रेस अकेले इस प्रस्ताव को प्रभावी रूप से आगे नहीं बढ़ा सकती।
लेकिन यदि कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल एकजुट होते हैं तो यह पहल न केवल संसद के भीतर बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे को लेकर भी एक बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकती है।
फिलहाल लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर तृणमूल कांग्रेस के कुल 40 सांसद हैं। इसके अलावा समाजवादी पार्टी के 41, आम आदमी पार्टी के 13, डीएमके के 32 और आरजेडी के 9 सांसद हैं। कांग्रेस के पास दोनों सदनों में कुल 126 सांसद हैं। ऐसे में कांग्रेस का समर्थन न मिलने पर भी बाकी विपक्षी दल मिलकर इम्पीचमेंट प्रस्ताव ला सकते हैं। हालांकि संख्या के लिहाज से संसद के किसी भी सदन में इस प्रस्ताव के पारित होने की संभावना नहीं है।
इसके बावजूद राजनीतिक संघर्ष का उदाहरण स्थापित करने के लिए तृणमूल नेतृत्व जल्द इम्पीचमेंट प्रस्ताव लाना चाहता है।
वहीं भाजपा नेतृत्व इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेने के मूड में नहीं है। केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा, “इम्पीचमेंट प्रस्ताव कोई भी ला सकता है, लेकिन उसके लिए जरूरी बहुमत विपक्ष के पास नहीं है। इससे उनकी कमजोरी ही उजागर होगी।”