इंदौरः भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से फैल रही बीमारी ने गंभीर रूप ले लिया है। सोमवार को 38 नए मामलों की पुष्टि हुई है, जबकि अब तक 7 मौतें हो चुकी हैं। अस्पतालों में कुल 110 मरीज भर्ती हैं, जिनमें 15 की हालत गंभीर है और उन्हें ICU में रखा गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों से अधिक प्रभावित लोग हैं। जबकि विभाग ने 7 मौतें दर्ज की हैं, वहीं ग्रामीण 17 मौतों का दावा कर रहे हैं।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार को Kobo Tool के जरिए वास्तविक समय में घर-घर सर्वेक्षण किया। यह तकनीक क्षेत्र की स्थिति का तुरंत आकलन करने और प्रभावित परिवारों तक क्लोरीनेटेड पानी और जरूरी दवा पहुंचाने में मदद कर रही है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी के निर्देशन में लगभग 200 टीमें काम कर रही हैं। प्रत्येक टीम में एक डॉक्टर, एक नर्सिंग ऑफिसर, एक कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर, एक ASHA कार्यकर्ता और एक ANM शामिल हैं। इन टीमों ने 2,745 घरों का दौरा कर करीब 14,000 लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं और दवाइयां पहुंचाईं।
हर घर में 10 ORS पैकेट, 30 जिंक टैबलेट और क्लीन वाटर ड्रॉपर वितरित किए गए। लोगों को 10 लीटर पानी में 8–10 ड्रॉप डालकर एक घंटे बाद पीने की सलाह दी गई। स्वास्थ्य कर्मियों ने दवा पूरी मात्रा में लेने, पानी उबालकर पीने और हाथ धोने की सही विधि भी बताई।
जिला कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर पांच एंबुलेंस लगातार तैनात हैं। डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी 24 घंटे ड्यूटी पर हैं। मरीजों को एम वाई हॉस्पीटल, ऑरोबिंदो हॉस्पीटल और बच्चों को चाचा नेहरु हॉस्पीटल में भर्ती कराया जा रहा है। निजी अस्पतालों में इलाज और दवा मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकट केवल तत्काल स्वास्थ्य समस्या नहीं है, बल्कि बच्चों और बुजुर्गों के लिए लंबे समय तक संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन लंबी अवधि के लिए जल प्रबंधन, स्वच्छता और जनता की जागरूकता जरूरी है।