गांधीनगर (गुजरात) : भारत और जर्मनी ने सोमवार को रक्षा, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, ऊर्जा और मानव संसाधन सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई अहम समझौतों को अंतिम रूप दिया। ये समझौते जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान किए गए।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों देशों ने कुल 19 समझौते हुए और रणनीतिक, आर्थिक तथा जन-जन के बीच संपर्क के स्तंभों में सहभागिता को और गहरा करने के लिए कई कदमों की घोषणा की।
प्रमुख उपलब्धियों में द्विपक्षीय रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक संयुक्त आशय घोषणा (Joint Declaration of Intent) शामिल है। भारत–जर्मनी सीईओ फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “इससे हमारी कंपनियों को रक्षा क्षेत्र में सह-नवाचार और सह-उत्पादन के लिए स्पष्ट नीतिगत समर्थन मिलेगा। अंतरिक्ष क्षेत्र में भी सहयोग के नए अवसर खुलेंगे।”
आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए भारत और जर्मनी ने संयुक्त भारत–जर्मनी आर्थिक एवं निवेश समिति में एकीकृत किए जाने वाले सीईओ फोरम की स्थापना का भी निर्णय लिया।
महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में दोनों देशों ने कई आशय घोषणाओं पर हस्ताक्षर किए, जिनमें सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम साझेदारी, महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग और दूरसंचार में साझेदारी शामिल है।
ऊर्जा और सततता भी समझौतों के प्रमुख केंद्र बिंदु रहे। हरित अमोनिया के लिए भारत की एएम ग्रीन और जर्मनी की Uniper Global Commodities के बीच एक ऑफटेक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड और गैस व जल उद्योग के लिए जर्मन तकनीकी एवं वैज्ञानिक संघ के बीच नवीकरणीय ऊर्जा पर सहयोग हेतु एक समझौता ज्ञापन भी संपन्न हुआ।
शिक्षा, कौशल विकास और आवागमन के क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए एक रोडमैप अपनाया गया। साथ ही हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान में नवीकरणीय ऊर्जा के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने सहित अतिरिक्त समझौते किए गए।
जर्मनी ने यह भी घोषणा की कि उसके देश से होकर यात्रा करने वाले भारतीय पासपोर्ट धारकों को वीज़ा-मुक्त ट्रांज़िट की सुविधा दी जाएगी। दोनों देशों ने ट्रैक 1.5 विदेश नीति एवं सुरक्षा संवाद तथा हिंद-प्रशांत पर केंद्रित एक द्विपक्षीय संवाद तंत्र स्थापित करने पर भी सहमति जताई, ऐसा विदेश मंत्रालय ने बताया।
ग्रीन और सतत विकास साझेदारी के तहत जर्मनी ने नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, पीएम ई-बस सेवा कार्यक्रम और जलवायु-सहिष्णु शहरी अवसंरचना परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त 1.24 अरब यूरो देने की प्रतिबद्धता जताई।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार जर्मनी पहले ही 2030 तक इस साझेदारी के तहत 10 अरब यूरो देने की प्रतिबद्धता जता चुका है, जो मुख्यतः रियायती ऋण के रूप में है। 2022 से अब तक लगभग 5 अरब यूरो या तो उपयोग में लाए जा चुके हैं या परियोजनाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं। नवीकरणीय ऊर्जा में वैश्विक निवेश के लिए भारत–जर्मनी मंच के तहत बैटरी भंडारण कार्य समूह की भी शुरुआत की गई है।