नई दिल्ली: भारत दौरे पर आए चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को दिल्ली में भाजपा के मुख्यालय का दौरा किया। इसके बाद मंगलवार को वे दिल्ली स्थित आरएसएस कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने संघ परिवार के शीर्ष पदाधिकारियों से मुलाकात की। इस मुद्दे पर सीधे तौर पर भाजपा को निशाना बनाते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, “भाजपा ने तो गिरगिट को भी मात दे दी है। जिनके लिए लाल आंख दिखानी चाहिए थी, उनके लिए आज लाल कालीन बिछा दी गई। भाजपा के बाद संघ परिवार ने भी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं से मुलाकात क्यों की? क्या वे आपस में सांस्कृतिक आदान-प्रदान कर रहे हैं?”
खेड़ा ने आगे कहा, “भाजपा का दोहरापन और झूठ एक बार फिर सामने आ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेताओं की चीन से नजदीकियां कोई नई बात नहीं हैं। समस्या यह है कि इन सबका नतीजा हमारे देश के लिए कितना नुकसानदेह होगा।”
तृणमूल कांग्रेस ने भी हमला बोला है। मंगलवार को पार्टी की राज्यसभा में उपनेता सागरिका घोष ने एक्स पर लिखा, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को सैन्य सहायता दी थी। शक्सगाम घाटी को अपनी बताते हुए चीन ने दावा किया है। वह पहले ही भारतीय भूभाग के एक हिस्से पर कब्जा कर चुका है। इतना सब होने के बाद भी भाजपा क्या कर रही है? चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं का दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में स्वागत किया गया। जरा सोचिए, अगर कोई विपक्षी दल या उसका नेता ऐसा करता तो क्या होता?”
भारतीय सेना के कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों का लंबे अनुभव के आधार पर बार-बार कहना रहा है कि सांप और चीन में चीन अधिक खतरनाक है। उनका तर्क है कि सांप दो प्रकार के होते हैं-विषैले और विषहीन लेकिन चीन का कोई प्रकार नहीं है। चीन जो कहता है, करता उसका ठीक उलटा है और अतीत में इसके कई प्रमाण मिल चुके हैं।
विपक्षी नेताओं का यह भी आरोप रहा है कि पूर्वी लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्सों में अभी भी चीनी सेना डटी हुई है। पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना द्वारा किए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने खुले तौर पर पाकिस्तान को हथियार और सैन्य रणनीतिक सहायता दी थी। अब चीन ने लद्दाख की शक्सगाम घाटी को अपनी संपत्ति बताया है। इसके जवाब में भारत के सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को दिल्ली में कहा कि शक्सगाम घाटी में चीन या पाकिस्तान की किसी भी आक्रामक कार्रवाई को भारत किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगा क्योंकि यह इलाका भारत का अभिन्न अंग है।
राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि इस स्थिति में संसद के आगामी बजट सत्र से पहले भाजपा और आरएसएस की यह चीन ‘मित्रता’ विपक्षी खेमे को नया राजनीतिक बल दे सकती है।