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बच्ची ने खिलौने के जरिए दरिंदे को पहचाना, सिर्फ 35 दिनों में हैवान को मिली मौत की सजा

By कौशिक दत्ता, Posted by: लखन भारती

Jan 17, 2026 23:26 IST

गुजरात के राजकोट के आटकोट क्षेत्र में सात साल की मासूम के साथ हुई हैवानियत के मामले में स्पेशल कोर्ट ने 35 दिनों के भीतर फैसला सुनाते हुए आरोपी को फांसी की सजा दी है। पुलिस की तेज जांच, मजबूत सबूत और बच्ची की गवाही ने केस को निर्णायक मोड़ दिया। खासबात ये है कि बच्ची ने खिलौने के जरिए आरोपी को पहचान लिया था।

खेलते हुए बचपन की मुस्कान, और फिर मासूम के साथ ऐसी दरिंदगी जिसने पूरे समाज को झकझोर दिया। गुजरात के राजकोट जिले में सात साल की मासूम के साथ हुई रेप की घटना ने देशभर में आक्रोश पैदा कर दिया था। अब उसी मामले में त्वरित न्याय की मिसाल पेश करते हुए स्पेशल कोर्ट ने आरोपी रेमसिंह तेरसिंह डुडवा को फांसी की सजा सुनाई है। यह फैसला घटना के महज 35 दिनों के भीतर आया, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिली है।

4 दिसंबर को मासूम के साथ की थी हैवानियत

घटना 4 दिसंबर 2025 की है, जब खेत में खेल रही बच्ची को आरोपी बहला-फुसलाकर झाड़ियों की ओर ले गया और उसके साथ हैवानियत की। बच्ची को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने जटिल ऑपरेशन के बाद उसकी जान बचाई। इस घटना ने पूरे गुजरात को झकझोर कर रख दिया था।

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की। 8 दिसंबर को आरोपी को गिरफ्तार किया गया और केवल 11 दिनों में चार्जशीट दाखिल कर दी गई। जांच के दौरान आरोपी की निशानदेही पर अहम सबूत बरामद हुए और डीएनए रिपोर्ट ने भी उसकी संलिप्तता की पुष्टि की। राजकोट ग्रामीण के एसपी विजयसिंह गुर्जर ने बताया कि मेडिकल, तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ-साथ बच्ची की पहचान परेड इस केस की सबसे मजबूत कड़ी बनी।

खिलौने के जरिए बच्ची ने हैवान को पहचाना

पहचान परेड के दौरान अधिकारियों ने एक मानवीय और संवेदनशील तरीका अपनाया। कई लोगों के हाथों में अलग-अलग खिलौने दिए गए, लेकिन बच्ची ने हर बार बिना किसी भ्रम के आरोपी को पहचान लिया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह पल जांच के लिए निर्णायक साबित हुआ।

सरकारी वकील एस. के. वोरा ने कोर्ट में दलील दी कि यह अपराध दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी में आता है। उन्होंने बताया कि आरोपी को अपने कृत्य पर कोई पछतावा नहीं था और वह अदालत में भी खुद को निर्दोष बताता रहा। कोर्ट ने सभी सबूतों, गवाहों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए उसे दोषी ठहराया और फांसी की सजा सुनाई।

इस पूरे मामले में कोर्ट ने रोजाना सुनवाई की और केवल छह दिनों में गवाही और बहस पूरी कर ली गई। बच्ची के पिता ने भी न्याय की मांग करते हुए अदालत को पत्र लिखा था। इस फैसले ने पीड़ित परिवार को बड़ी राहत दी है।

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