पुरानी दोस्ती अब दुश्मनी में बदल रही है? यमन की धरती अब दो अरब ‘भाइयों’ – सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच अघोषित रणक्षेत्र में तब्दील हो गयी है। शुक्रवार को सऊदी के लड़ाकू विमानों ने दक्षिणी यमन में अमीराती समर्थित अलगाववादी समूह ‘सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल’ (STC) के एक ठिकाने पर एयरस्ट्राइक किया।
दावा किया जा रहा है कि इसमें कम से कम सात लोग मारे गए और 20 से ज्यादा घायल हो गए।
कई दिनों से तनाव बढ़ रहा था। रियाद के समर्थन वाली यमन सरकार ने अमीराती सैनिकों को देश छोड़ने के लिए 24 घंटे की मोहलत दी थी। 31 जनवरी को अमीराती सरकार ने घोषणा कर दी कि उसके सभी सैनिक यमन से वापस बुला लिए गए हैं।
इसके तुरंत बाद ही सऊदी सेना ने वादी हद्रामौत में अल-खासा शिविर पर यह हमला किया। इससे पहले 30 दिसंबर को रियाद ने भी मुकल्ला पोर्ट पर बमबारी की थी जिसमें अमीराती पर हथियार की तस्करी का आरोप लगाया गया था।
पश्चिम एशियाई विश्लेषकों का कहना है कि हूतियों के खिलाफ एक साथ लड़ाई शुरू करने के बावजूद रियाद और अबू धाबी के बीच हितों का टकराव अपने चरम पर पहुंच गया है। सऊदी अरब जहां यमन के राष्ट्रपति अल-अमीर की सरकार को बनाए रखना चाहता है वहीं अमीरात अलग देश की मांग कर रहे STC का समर्थन करता है।
वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब हद्रामौत और माहरा इलाकों में STC के बढ़ते दबदबे को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा मानता है। दो अरब सुपरपावर के बीच यह आमने-सामने की टक्कर जंग से जूझ रहे यमन को एक नए और भी भयानक गृह युद्ध की ओर धकेल रहा है।