नई दिल्ली : फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है। बहुत से लोग फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश केवल धनराशि बढ़ाने के लिए करते हैं। लेकिन बहुतों को यह जानकारी नहीं होती कि FD से नियमित मासिक आय भी प्राप्त की जा सकती है। सही इंटरेस्ट पेआउट विकल्प चुनने पर हर महीने एक निश्चित राशि मिल सकती है। इस आय से दैनिक खर्चों को पूरा करना भी आसान हो जाता है।
मासिक FD प्लान क्या है?
फिक्स्ड डिपॉजिट करते समय ग्राहक यह तय कर सकता है कि वह ब्याज की राशि किस प्रकार लेना चाहता है। मुख्य रूप से दो विकल्प होते हैं— क्यूम्युलेटिव और नॉन-क्यूम्युलेटिव।
1) क्यूम्युलेटिव विकल्प : इसमें ब्याज हर वर्ष मूलधन में जुड़ जाता है। परिपक्वता (मैच्योरिटी) पर एक साथ पूरी राशि मिलती है। चाहें तो इसे ऑटो-रिन्यू भी किया जा सकता है।
2) नॉन-क्यूम्युलेटिव विकल्प : इस विकल्प में ब्याज की राशि तय अंतराल पर नियमित रूप से मिलती है— मासिक, त्रैमासिक या वार्षिक आधार पर। जो लोग मासिक आय चाहते हैं, वे आमतौर पर यही विकल्प चुनते हैं।
क्यूम्युलेटिव और नॉन-क्यूम्युलेटिव FD क्या है?
जब FD का ब्याज साल में एक बार कंपाउंड होकर मैच्योरिटी के समय दिया जाता है, तो उसे क्यूम्युलेटिव फिक्स्ड डिपॉजिट कहा जाता है। और जब ब्याज हर महीने, तीन महीने या साल में दिया जाता है, तो उसे नॉन-क्यूम्युलेटिव फिक्स्ड डिपॉजिट कहा जाता है।
अब सवाल यह है कि मासिक पेआउट लेना बेहतर है या अवधि समाप्त होने पर पूरी राशि लेना— कौन-सा अधिक लाभकारी है? आइए एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए किसी व्यक्ति ने 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर की। यदि मासिक पेआउट विकल्प चुना जाए, तो हर महीने लगभग 6 हजार 666 रुपये मिलेंगे। 5 वर्षों में कुल ब्याज लगभग 4 लाख रुपये होगा। यानी कुल मिलाकर उसे लगभग 14 लाख रुपये प्राप्त होंगे।
दूसरी ओर यदि क्यूम्युलेटिव विकल्प चुना जाए और ब्याज सालाना कंपाउंड हो तो 5 वर्षों में राशि बढ़कर लगभग 14 लाख 69 हजार 300 रुपये हो जाएगी। इस स्थिति में कुल ब्याज लगभग 4 लाख 69 हजार 300 रुपये मिलेगा। यानी मासिक पेआउट की तुलना में क्यूम्युलेटिव FD में लगभग 69 हजार 300 रुपये अधिक मिलते हैं।
मासिक ब्याज देने वाली FD के फायदे
सेवानिवृत्त लोगों या नियमित आय चाहने वालों के लिए मासिक FD काफी उपयोगी होती है, क्योंकि-
हर महीने निश्चित राशि मिलती है। जिससे आय की स्थिरता बनी रहती है।
पहले से पता होता है कि हर महीने कितनी रकम आएगी। जिससे खर्च की योजना बनाना आसान होता है।
मासिक ब्याज से दैनिक खर्च, आपात जरूरतें या छोटे निवेश किए जा सकते हैं और नकदी की उपलब्धता बनी रहती है।
मासिक ब्याज की राशि को म्यूचुअल फंड या रिकरिंग डिपॉजिट में निवेश कर अतिरिक्त संपत्ति बनाने का अवसर भी मिलता है।
कुल मिलाकर जो लोग नियमित आय चाहते हैं उनके लिए नॉन-क्यूम्युलेटिव FD एक अच्छा विकल्प है। वहीं जिनका लक्ष्य अधिक रिटर्न पाना है वे क्यूम्युलेटिव FD चुन सकते हैं। निवेश से पहले अपनी जरूरतों और वित्तीय लक्ष्यों को समझकर निर्णय लेना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।