नई दिल्ली : इक्विटी बाजार में EPFO का निवेश बढ़कर 10 प्रतिशत तक पहुंच गया है। एम्प्लॉइज प्रॉविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन अब शेयर बाजार में और अधिक सक्रिय रूप से निवेश कर रहा है ताकि सदस्यों को दीर्घकाल में स्थिर वार्षिक रिटर्न सुनिश्चित किया जा सके।
नई दिल्ली सूत्रों के अनुसार इक्विटी मार्केट यानी शेयर बाजार में पहली बार EPFO ने 10 प्रतिशत एक्सपोजर की सीमा छू ली है। संगठन के एक अधिकारी ने बताया कि EPFO अब इक्विटी मार्केट में नए रूप से जमा होने वाली राशि निवेश कर सकता है और हम इक्विटी में निवेश बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
वर्तमान में EPFO अपने नए फंड का अधिकतम 15 प्रतिशत तक इक्विटी में निवेश कर सकता है। पहले यह सीमा कम थी। सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दरें कम होने के कारण अधिक रिटर्न पाने के लक्ष्य से EPFO धीरे-धीरे इक्विटी की ओर झुक रहा है।
EPFO का निर्धारित निवेश ढांचा—
जनरल सेक्शन : 45–65 प्रतिशत
डेट (Debt) : 20–45 प्रतिशत
इक्विटी : 5–15 प्रतिशत
शॉर्ट-टर्म डेट (Debt) : अधिकतम 5 प्रतिशत
पिछले वित्त वर्ष में EPFO ने वार्षिक 8.25 प्रतिशत दर से ब्याज की घोषणा की थी। उसी समय 10 साल के सरकारी बॉन्ड का औसत रिटर्न 6.86 प्रतिशत था। निफ्टी50 और बीएसई सेंसेक्स में रिटर्न क्रमशः 5.3 प्रतिशत और 5.1 प्रतिशत था।
EPFO मुख्य रूप से ETF (Exchange Traded Fund) के माध्यम से शेयर बाजार में निवेश करता है। बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी50 आधारित ETF में पैसे लगाये जाते हैं। यह प्रणाली 2015 से चल रही है। हाल की सुधारों में ETF से प्राप्त राशि को फिर से इक्विटी में पुनर्निवेश करने की मात्रा बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी गई है।
रिजर्व बैंक ने भी EPFO को निवेश को और गतिशील बनाने की सलाह दी है। RBI के अनुसार केवल डेट में नहीं, बल्कि समय के अनुसार इक्विटी में अधिक निवेश करने पर भविष्य में बेहतर रिटर्न प्राप्त किया जा सकता है।
कुल मिलाकर EPFO अब ऐसे मार्ग पर चल रहा है जिससे लगभग 25 लाख करोड़ रुपये के रिटायरमेंट फंड को दीर्घकाल में सुरक्षित रखा जा सके और कर्मचारियों के लिए नियमित व बेहतर रिटर्न सुनिश्चित किया जा सके।