कोलकाता : राज्य में चुनाव समाप्त हुए काफी समय बीत चुका है और गर्मी की छुट्टियां भी खत्म हो चुकी हैं। इसके बावजूद राज्य के कई स्कूलों में अब तक केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान डेरा डाले हुए हैं। कहीं ढाई महीने से तो कहीं लगभग दो महीने से स्कूल भवनों में केंद्रीय बलों की मौजूदगी बनी हुई है। इसके कारण इन विद्यालयों में पढ़ाई-लिखाई का काम गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। अब इस स्थिति को समाप्त करने के लिए राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विभाग ने स्कूल परिसरों से केंद्रीय बलों को तत्काल हटाने का निर्देश जारी किया है।
हाल ही में स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों तथा कोलकाता पुलिस आयुक्त को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वर्ष 2026 का आम चुनाव समाप्त हो चुका है और गर्मी की छुट्टियों के बाद 1 जून से स्कूलों में नियमित शैक्षणिक गतिविधियां भी शुरू हो गई हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग को प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार चुनाव समाप्त होने के बाद भी राज्य के लगभग 165 विद्यालयों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवान अब भी ठहरे हुए हैं। यह जानकारी विभिन्न जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआई) की रिपोर्ट से सामने आई है।
विभाग ने माना है कि जब चुनावी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और स्कूलों में पढ़ाई शुरू हो गई है, तब शैक्षणिक संस्थानों में केंद्रीय बलों की निरंतर मौजूदगी उचित नहीं है। इसलिए जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वह तत्काल प्रभाव से इन स्कूलों से केंद्रीय बलों को हटाकर किसी अन्य गैर-शैक्षणिक भवन में उनके ठहरने की व्यवस्था करे।
केंद्रीय बलों की मौजूदगी के कारण अनेक स्कूलों में सामान्य कक्षाओं का संचालन प्रभावित हुआ। कई विद्यालयों में शिक्षकों को मजबूरी में स्कूल भवन के बाहर, बरामदों या अन्य खुले स्थानों पर कक्षाएं संचालित करनी पड़ीं।
स्कूल प्रशासन, शिक्षक और अभिभावक लगातार इस समस्या को लेकर चिंता जता रहे थे। उनका कहना था कि लंबे समय तक स्कूल भवनों का उपयोग सुरक्षा बलों के आवास के रूप में होने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और सामान्य शैक्षणिक वातावरण भी बाधित हो रहा है।
राज्य सरकार के इस नए निर्देश के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि प्रभावित स्कूल जल्द ही अपनी सामान्य शैक्षणिक व्यवस्था में लौट सकेंगे। शिक्षक, छात्र और अभिभावक लंबे समय से इस निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे थे।
लंबे इंतजार के बाद जारी हुए इस निर्देश को शिक्षा जगत के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। अब जिला प्रशासन पर यह जिम्मेदारी होगी कि वह जल्द से जल्द केंद्रीय बलों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करे और स्कूल परिसरों को पूरी तरह शैक्षणिक गतिविधियों के लिए उपलब्ध कराए।