सिर्फ मध्य प्रदेश का इंदौर या हरियाणा का पलवल ही नहीं बल्कि दूषित पेयजल की समस्या से न्यू टाउन का प्रमुख हाउसिंग कॉम्प्लेक्स भी जुझ रहा है। आरोप है कि पिछले 3 सप्ताह से हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के ई-ब्लॉक के 300 से अधिक निवासी दस्त (Diarrhoea) से पीड़ित हैं। उनमें से कुछ की हालत अत्यंत गंभीर बतायी जाती है।
इन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के ओवरहेड टैंक का रख-रखाव अच्छी तरह से नहीं होने की वजह से पानी दूषित हो गया है। दावा किया जा रहा है कि कई बार प्रबंधन से इस बाबत शिकायत करने के बावजूद कोई फायदा नहीं हुआ।
सोमवार को स्थानीय निवासियों ने हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के फेसिलिटी मैनेजर का घेराव कर विरोध-प्रदर्शन किया। न्यू टाउन के इस हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में करीब 522 लोग रहते हैं। उनका आरोप है कि ई-ब्लॉक के लगभग प्रत्येक फ्लैट में कम से कम एक व्यक्ति को पेटदर्द, उल्टी और तेज बुखार की शिकायत है।
उसी हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के एक निवासी का कहना है कि मेरी दो बेटियां अस्पताल में भर्ती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि दूषित पानी की वजह से ही ऐसा हुआ है। नल खोलते ही पीला पानी निकल रहा है जिससे तेज बदबू आ रही है। हमने बार-बार प्रबंधन से इस बारे में शिकायत की है लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।
एक अन्य निवासी का कहना है कि लगभग प्रत्येक बिल्डिंग में ही कोई न कोई बीमार है। मेरी बेटी का भी पेट की समस्या का इलाज चल रहा है। परिवार के तीनों सदस्य ही दस्त की समस्या से जुझ रहे हैं। यह कोई संयोग की बात नहीं हो सकती - निश्चित रूप से पानी ही दूषित हो गया है।
हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के हर घर में दस्त का संक्रमण फैलने के बावजूद प्रबंधन द्वारा कोई कदम नहीं उठाने के आरोप में निवासियों ने टेक्नोसिटी थाना में शिकायत दर्ज करवायी। इसके बाद सोमवार को पुलिस ने हाउसिंग कॉम्प्लेक्स का दौरा किया और फेसिलिटी मैनेजमेंट से जल्द से जल्द इस बाबत कदम उठाने की हिदायत दी।
इस बीच दस्त से संक्रमित होने की जानकारी मिलते ही NKDA भी तत्पर हो गया है। हालांकि NKDA (NewTown Kolkata Development Authority) के एक अधिकारी का दावा है कि पिछले सप्ताह पानी की जांच की गयी थी। उसकी रिपोर्ट में दूषण का कोई सबूत नहीं मिला है। उनका कहना है कि नियमित तौर पर प्रत्येक सप्ताह ही पानी की गुणवत्ता जांची जाती है।
पिछले सप्ताह तक उक्त हाउसिंग कॉम्प्लेक्स को जो जलापूर्ति की गयी थी, उसके दूषित होने का कोई सबूत नहीं मिला था। लेकिन शिकायत मिलने के बाद नमूना एकत्र किया गया है। पता लगाया जाएगा कि पानी दूषित है या संरक्षण व्यवस्था की अंतरिम कोई समस्या है।