कोलकाताः पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में चल रही SIR 2025 प्रक्रिया को लेकर केंद्रीय चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर कई गंभीर शिकायतें दर्ज कराईं। उनका कहना है कि तकनीकी कारणों और ERO को सूचित किए बिना वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे मतदाता अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुनवाई के दौरान ‘संदेहास्पद मतदाता’ या ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ वाले मामलों में दस्तावेज़ों की जांच कई बार अन्य जिलों या राज्यों से कराई जा रही है। इससे सुनवाई में देरी हो रही है और समय सीमा पूरी न होने का खतरा बढ़ रहा है।
ममता ने बिहार के SIR उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि वहां परिवार रजिस्टर को मान्य दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार किया जाता है, जबकि बंगाल में यह सूची संशोधन में स्वीकार नहीं किया जा रहा है। उन्होंने आयोग की भूमिका पर सवाल उठाया।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने BLO की लगातार मौत और बहुमंजिला आवासों में पोलिंग बूथ बनाने जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया में प्रशासनिक स्वेच्छा और पद्धतिगत अस्वच्छता देखी जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।
ममता ने आयोग से अपील की है कि वे इस प्रक्रिया को तुरंत रोकें और पूरे SIR ढांचे का पुनर्मूल्यांकन करें, ताकि जनता का भरोसा बहाल हो और आगामी चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित हो सकें। तृणमूल कांग्रेस की ओर से पहले ही SIR प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न हो रही समस्याओं और सुनवाई में देरी को लेकर विरोध जताया गया था। पार्टी ने पूरे चुनावी ढांचे में सुधार की मांग की है।
विश्लेषकों के अनुसार, ममता का यह कदम SIR प्रक्रिया पर विवाद बढ़ा सकता है और चुनाव आयोग पर राज्य स्तर पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। यदि आयोग सुधारात्मक कदम नहीं उठाता है, तो इससे मतदाता विश्वास प्रभावित हो सकता है। तृणमूल कांग्रेस इसे अपने चुनावी एजेंडा में इस्तेमाल कर सकती है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक विवाद के रूप में पेश कर सकता है।