उदयपुर (राजस्थान): उदयपुर जिले की कोटड़ा तहसील के सामोली, खूणा और पिपली के दूरस्थ आदिवासी एवं पहाड़ी इलाकों में लगभग 170 एकड़ में फैली अवैध अफीम की खेती को नष्ट कर दिया गया। इसकी अनुमानित कीमत 275 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
यह संयुक्त अभियान नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), राजस्थान एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और राज्य पुलिस द्वारा चलाया गया।
फरार अभियुक्तों को पकड़ने के लिए एनसीबी और राजस्थान एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स द्वारा गहन निगरानी और छानबीन जारी है।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के अधिकारियों ने बताया कि इससे मिलते जुलते लेकिन अलग मामले में बठिंडा पुलिस ने फरवरी में दो मादक पदार्थ तस्करों को गिरफ्तार किया और उनके पास से राजस्थान से तस्करी कर लाई गई 6.5 किलोग्राम अफीम बरामद की।
एएनआई को एसपी सिटी नरेंद्र सिंह ने बताया, “पंजाब सरकार के चल रहे नशा-विरोधी अभियान के तहत बठिंडा पुलिस को बड़ी सफलता मिली। महाराजा रणजीत सिंह टेक्निकल यूनिवर्सिटी के सामने एक नाका लगाया गया था, जहां एक स्विफ्ट कार में जा रहे दो लोगों को रोका गया। तलाशी के दौरान उनके पास से 4 किलोग्राम अफीम बरामद हुई। इस संबंध में कैनाल कॉलोनी थाने में मामला संख्या 39 दर्ज किया गया। जगीर सिंह सीरा और महेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया और 4 किलोग्राम अफीम बरामद की गई। बाद में जगीर सिंह की निशानदेही पर 2.5 किलोग्राम अतिरिक्त अफीम भी बरामद की गई। उन्हें अदालत में पेश कर 3 दिन की पुलिस रिमांड ली गई है। पूछताछ के दौरान और बड़े खुलासों की उम्मीद है।”
उन्होंने आगे बताया, “जांच में सामने आया कि वे अफीम राजस्थान से लाते थे और बठिंडा सहित आसपास के कई जिलों में सप्लाई करते थे। जगीर सिंह सीरा के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत छह मामले दर्ज हैं। वह दो वाणिज्यिक मामलों में 10 साल की सजा काट रहा था और सितंबर 2024 में जमानत पर रिहा हुआ था। रिहाई के बाद उसने फिर से नशा तस्करी शुरू कर दी।”