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बूंदी में भ्रष्टाचार और लापरवाही पर बड़ी चोट, मंत्री दिलावर के एक्शन से 12 अधिकारी सस्पेंड

केशवरायपाटन के BDO को निलंबित कर उनका मुख्यालय जयपुर निर्धारित किया गया है। वहीं तालेड़ा के विकास अधिकारी को एपीओ करते हुए पंचायती राज विभाग के जयपुर मुख्यालय भेज दिया गया है।

By लखन भारती

Jun 12, 2026 14:55 IST

जयपुरः राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने बूंदी जिले में विकास कार्यों और सफाई व्यवस्था में सामने आई गंभीर अनियमितताओं पर बड़ा प्रशासनिक प्रहार किया है। करीब एक महीने पहले किए गए उनके औचक निरीक्षण की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद बीडीओ सहित कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। इस फैसले ने पंचायती राज विभाग में हड़कंप मचा दिया है।

कार्रवाई के तहत केशवरायपाटन के विकास अधिकारी (BDO) को निलंबित कर उनका मुख्यालय जयपुर निर्धारित किया गया है। वहीं तालेड़ा के विकास अधिकारी को एपीओ करते हुए पंचायती राज विभाग के जयपुर मुख्यालय भेज दिया गया है।

इसके अलावा केशवरायपाटन, तालेड़ा और हिंडोली पंचायत समितियों के नोडल अतिरिक्त विकास अधिकारियों तथा सहायक अभियंताओं के खिलाफ 16 सीसीए के तहत विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है।

निरीक्षण में सामने आई खामियों के बाद स्वच्छ भारत मिशन के तहत कार्यरत तालेड़ा, केशवरायपाटन और हिंडोली के ब्लॉक कोऑर्डिनेटर्स की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। जिला स्तर के मिशन कोऑर्डिनेटर के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।

साथ ही संबंधित पंचायत समितियों में कार्यरत सभी कनिष्ठ तकनीकी सहायकों (JTA) को उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है।

मामले में कई ग्राम पंचायतों के प्रशासकों पर भी कार्रवाई की गई है। जमीतपुरा, सुवास, रडी, भीया और धोबड़ा ग्राम पंचायतों के प्रशासकों को उनके पदों से हटा दिया गया है।

वहीं देलूंदा, सिंता, तीरथ, चडी, गुडली और लेसरदा ग्राम पंचायतों के प्रशासकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

इसके अलावा 11 ग्राम विकास अधिकारियों (VDO) को निलंबित करते हुए उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

7 दिन में देना होगा तीन साल का हिसाब

सरकार ने उन ग्राम पंचायतों के अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़ा अल्टीमेटम दिया है जहां अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्हें पिछले तीन वर्षों के दौरान सफाई व्यवस्था, विकास कार्यों और वित्त आयोग की राशि से किए गए खर्च का पूरा लेखा-जोखा सात दिन के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि खर्च की गई राशि का संतोषजनक विवरण नहीं मिलने पर और कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

मामले की शुरुआत 9 मई को मंत्री मदन दिलावर के बूंदी दौरे से हुई थी। इस दौरान ग्रामीणों ने सफाई व्यवस्था, विकास योजनाओं और सरकारी धन के उपयोग में गड़बड़ियों की शिकायत की थी।

शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मंत्री ने कई ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में जगह-जगह गंदगी, जाम नालियां, कचरे के ढेर और विकास कार्यों में लापरवाही सामने आई।

जांच के दौरान पौधारोपण अभियानों में भी गंभीर विसंगतियां सामने आईं। रिकॉर्ड में हजारों पौधे लगाए जाने का दावा किया गया था, लेकिन मौके पर कई पौधे सूखे मिले जबकि अनेक स्थानों पर पौधारोपण के कोई निशान तक नहीं मिले।

एक सरकारी विद्यालय के निरीक्षण में भी स्थिति चिंताजनक मिली, जहां स्वीकृत शिक्षकों की तुलना में बड़ी संख्या में शिक्षक अनुपस्थित पाए गए।

निरीक्षण के बाद जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा विस्तृत जांच कर रिपोर्ट तैयार की गई थी। रिपोर्ट में सामने आई अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही के आधार पर यह व्यापक कार्रवाई की गई।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि किसी एक जिले में एक साथ इतने बड़े स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ की गई यह कार्रवाई हाल के वर्षों की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।

सरकार का संदेश साफ है कि विकास योजनाओं में लापरवाही, सरकारी धन के दुरुपयोग और जनहित से जुड़े कार्यों में अनियमितता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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