🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

प्रवासी पक्षियों का स्वर्ग बना गुजरात, लाखों पक्षियों ने डाला डेरा

साइबेरिया से कच्छ तक, प्रवासी पक्षियों की पहली पसंद गुजरात।

By रजनीश प्रसाद

Jan 04, 2026 18:51 IST

गांधीनगर: दुनिया भर में पक्षियों की लगभग 9,000 प्रजातियाँ पाई जाती हैं जिनमें से करीब 1,200 प्रजातियाँ भारत में मौजूद हैं। इनमें 400 से अधिक प्रजातियाँ विदेशी प्रवासी पक्षियों की हैं। ये प्रवासी पक्षी साइबेरिया, पूर्वी यूरोप, उत्तर और मध्य एशिया से हर साल भारत आते हैं जिनमें गुजरात उनका एक प्रमुख ठिकाना बन चुका है।

सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार गुजरात में पक्षियों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए पिछले डेढ़ दशक से सख्त कानून, नियम और योजनाएँ लागू की गई हैं। इन पहलों की शुरुआत उस समय हुई थी जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में इन्हें आगे बढ़ाया जा रहा है। इसका नतीजा यह हुआ है कि गुजरात पिछले 15 वर्षों से प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के लिए सबसे सुरक्षित राज्यों में गिना जा रहा है।

वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया और राज्य मंत्री प्रवीण माली के मार्गदर्शन में वन विभाग तथा कई पशु-पक्षी प्रेमी संगठन मिलकर पक्षियों के संरक्षण और बचाव का कार्य कर रहे हैं। इसी कारण गुजरात आज दुनिया भर के पक्षियों के लिए एक पसंदीदा राज्य बन गया है।

आंकड़ों के अनुसार जामनगर स्थित खिजड़िया पक्षी अभयारण्य में पिछले वर्ष 334 प्रजातियों के लगभग 3,09,062 पक्षी दर्ज किए गए। 2024 की गणना में नलसरोवर में 17 प्रजातियों के 4.12 लाख से अधिक पक्षी और थोल पक्षी अभयारण्य में 55,587 पक्षी पाए गए जिससे कुल संख्या 4.67 लाख से अधिक हो गई। वढवाणा वेटलैंड क्षेत्र में 2024-25 के दौरान 41 प्रजातियों के लगभग 35,932 प्रवासी पक्षी, 5 प्रजातियों के 5,147 पक्षी और 91 प्रजातियों के करीब 12,921 स्थानीय पक्षी दर्ज किए गए। कच्छ क्षेत्र में भी 2025 में लगभग 2,564 पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की गई।

नलसरोवर पक्षी अभयारण्य जिसे 1969 में घोषित किया गया था और 2012 में रामसर साइट का दर्जा मिला मध्य एशियाई प्रवासी मार्ग पर स्थित है। यहाँ दुनिया भर से 329 प्रजातियों के पक्षी देखे गए हैं। वहीं थोल और वढवाणा जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में दुर्लभ और स्थानीय पक्षी पाए जाते हैं।इन प्रयासों के चलते गुजरात आज पक्षी प्रेमियों के लिए एक “पैराडाइज” के रूप में उभर कर सामने आया है।

Prev Article
केरल : कोच्चि में निजी अस्पताल के बाहर खड़ी कार में महिला ने दिया बच्चे को जन्म
Next Article
ड्रग्स केस का डर दिखाकर ‘डिजिटल अरेस्ट’, बुज़ुर्ग से ठगे गए 7 करोड़ रुपये

Articles you may like: