चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव कुछ ही महीनों दूर हैं। इसी बीच राज्य की सत्ताधारी डीएमके सरकार के नगर प्रशासन और जल आपूर्ति मंत्री के. एन. नेहरू के खिलाफ 365 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के आरोप में मद्रास हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। यह कदम एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (इडी) द्वारा प्रस्तुत जानकारी की समीक्षा के बाद उठाया गया।
हाईकोर्ट के अनुसार, इडी द्वारा जमा किए गए दस्तावेज सिर्फ आरोप नहीं हैं। व्हाट्सएप चैट से लेकर डिजिटल लेनदेन तक स्पष्ट सबूत मौजूद हैं। आरोप है कि मंत्री ने पसंद की पोस्टिंग, सरकारी टेंडर दिलाने के एवज में 7 लाख से 1 करोड़ रुपये तक रिश्वत ली। कुल राशि लगभग 365.87 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जिसे रियल एस्टेट, सोने की खरीद और विदेश में संपत्ति खरीदने में इस्तेमाल किया गया।
चुनाव से पहले एजेंसी की सक्रियता: संयोग या योजना?
यह मामला राजनीतिक बहस को फिर से उकसा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 2014 के बाद से राज्य या लोकसभा चुनावों से कुछ महीने पहले इडी और सीबीआई की सक्रियता बढ़ जाती है। 2020 में राजस्थान, 2022 में पंजाब, 2023 में कर्नाटक और छत्तीसगढ़, हर चुनाव से कुछ दिन पहले विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई देखी गई। 2024 लोकसभा चुनाव में दो मुख्यमंत्री, अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया गया।
तमिलनाडु में भी यह पैटर्न साफ दिखाई दे रहा है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद डिरेक्टरेट ऑफ विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के लिए बाध्य हुआ। अब देखना है कि यह कानूनी लड़ाई चुनावी नतीजों को कितना प्रभावित करती है।