रायपुर: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में माओवादी विरोधी अभियान में सुरक्षाबलों को एक बार फिर बड़ी सफलता मिली है। बीजापुर इलाके में सुरक्षाबलों के साथ हुई गोलीबारी में दो माओवादियों की मौत हो गई। तलाशी अभियान के दौरान एके-47 समेत कई अत्याधुनिक हथियार बरामद किए गए हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, बीजापुर के दक्षिण-पश्चिमी इलाके के एक जंगल में माओवादियों के एक दल के छिपे होने की पुख्ता सूचना मिली थी। बताया जा रहा है कि उस जंगल में माओवादियों की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य पापा राव भी मौजूद था। खुफिया जानकारी के मुताबिक, इलाके में कम से कम 25 माओवादी छिपे हुए थे। सूचना मिलते ही जिला रिजर्व गार्ड, स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और सीआरपीएफ की कोबरा यूनिट की संयुक्त टीम ने तलाशी और घेराबंदी अभियान शुरू किया। जैसे ही सुरक्षाबल मौके पर पहुंचे, माओवादियों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में हुई मुठभेड़ के बाद शनिवार को दो माओवादियों के शव बरामद किए गए।
अधिकारियों ने बताया कि इलाके में अब भी किसी अन्य माओवादी के छिपे होने की आशंका के चलते सर्च ऑपरेशन जारी है। राहत की बात यह है कि इस मुठभेड़ में किसी भी सुरक्षाकर्मी के घायल होने की सूचना नहीं है। गौरतलब है कि पिछले साल बीजापुर इलाके में हुई मुठभेड़ में पापा राव की पत्नी ऊर्मिला की भी मौत हो गई थी। इसी महीने बीजापुर जिले के दक्षिणी क्षेत्र में एक अन्य एनकाउंटर में दो और माओवादी मारे गए थे।
इसके अलावा, पिछले गुरुवार को ही बीजापुर में 52 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था, जिनमें 21 महिलाएं शामिल थीं। पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में लख्खू करम उर्फ अनिल भी शामिल है, जो माओवादी डिविजनल कमेटी का सदस्य था। आत्मसमर्पण करने वाले 49 माओवादियों पर कुल 1 करोड़ 41 लाख रुपये का इनाम घोषित था। ये माओवादी मुख्य रूप से दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी, आंध्र प्रदेश–ओडिशा सीमा समिति और ब्रह्मगढ़ एरिया कमेटी से जुड़े हुए थे। केंद्र सरकार ने चालू वर्ष 31 मार्च तक देश से माओवादियों का पूरी तरह सफाया करने का लक्ष्य तय किया है।