कोलकाताः लिएंडर पेस तब ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में खेल रहे थे। उम्र केवल 15 साल की थी। उस समय स्मार्टफोन नहीं था। अचानक एक दिन एक टेलीग्राम उनके पास पहुंचा। लिखा था, 'जल्दी चंडीगढ़ में डेविस कप टीम में शामिल हो जाओ।' प्रेषक का नाम लिखा था एन.के.। लिएंडर ने सोचा कि स्कूल का दोस्त निखिल शरारत कर रहा है। पिताजी वेस पेज़ को फोन करके लिएंडर ने असली कारण जाना। लिएंडर कहते हैं, 'पिताजी तब मुझे बताते हैं, किसी ने मज़ाक नहीं किया। नरेश कुमार ने मुझे सच में डेविस कप टीम में बुलाया।'
ऐसे कई अज्ञात किस्से हैं ‘पेज़ एंड पार्टनर्स: द डेज़ ऑफ ट्रायम्फ्स’ किताब में। लेखक हैं रजत शुभ्र चट्टोपाध्याय। लियेंडर की मौजूदगी में किताब का विमोचन मंगलवार को दक्षिण कोलकाता संसद में हुआ। उपस्थित थे संगठन के सचिव हिरन्मय चट्टोपाध्याय, जो लिएंडर से पहले बंगाल टेनिस एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे थे।
लिएंडर ने बताया कि इस किताब में उनका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कौन सा है। लिएंडर के अनुसार, 'किताब की विषयवस्तु मेरे टेनिस जीवन के पार्टनर के बारे में है। यहाँ मार्टिना हिंगिस और मार्टिना नव्रतिलोवा का जिक्र है। हिंगिस चाहती थीं कि उन्हें लीड किया जाए। वहाँ मैं वह काम करता था। वहीं नव्रतिलोवा खुद लीड करती थीं। उनके कारण ही हमने विम्बलडन जीता।' उन्होंने जोड़ते हुए कहा, 'और मेरी जिंदगी के दो मेंटर्स का जिक्र है। एक नरेश कुमार अंकल और एक सोनाडा (हिरन्मय)। मैं जो कुछ भी बन पाया, वह इन दोनों के कारण ही है।'