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'अब और खेलने के काबिल नहीं', साइना नेहवाल ने लिया संन्यास, 2023 में खेला था आखिरी मैच

दिग्गज भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने खेल से संन्यास की पुष्टि कर दी है। 35 साल की साइना घुटने की पुरानी चोट की वजह से पिछले दो सालों से एक्शन से बाहर थीं। उन्होंने खेल को अलविदा कहते हुए कहा कि उनका शरीर अब इस खेल की शारीरिक जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता।

By सौम्यदीप दे, Posted by: लखन भारती

Jan 20, 2026 13:00 IST

नयी दिल्लीः भारत को 2012 में ओलंपिक पदक दिलाने वाले दिग्गज बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल अब बैडमिंटन कोर्ट पर खेलती नजर नहीं आएंगी। भारत की इस स्टार शटलर ने संन्यास की पुष्टि कर दी है। 2023 में आखिरी मैच खेलने वालीं 35 साल की इस स्टार ने कहा कि अब उनका शरीर इस खेल में साथ नहीं दे रहा है। लंदन ओलंपिक 2012 की कांस्य पदक विजेता साइना ने आखिरी प्रतिस्पर्धी मैच 2023 सिंगापुर ओपन में खेला था।

एक पॉडकास्ट में बात करते हुए साइना ने कहा, ‘मैंने दो साल पहले ही खेलना बंद कर दिया था। मुझे लगा कि मैंने अपनी शर्तों पर खेल शुरू किया और अपनी शर्तों पर ही छोड़ा, इसलिए अलग से संन्यास की घोषणा करने की जरूरत नहीं थी।’ उन्होंने आगे कहा, ‘अगर आप अब खेलने लायक नहीं हैं, तो बात वहीं खत्म हो जाती है। इसमें कोई दिक्कत नहीं है।’

पूर्व वर्ल्ड नंबर-1 खिलाड़ी ने बताया कि घुटने की हालत बहुत ज्यादा खराब हो चुकी है, जिसकी वजह से लगातार और तेज ट्रेनिंग करना अब संभव नहीं है। साइना ने कहा, ‘मेरी कार्टिलेज पूरी तरह घिस चुकी है, मुझे घुटनों में अर्थराइटिस है। यह बात मेरे माता-पिता और कोच को जाननी जरूरी थी। मैंने उनसे साफ कहा कि अब शायद मैं यह नहीं कर पाऊंगी, यह बहुत मुश्किल हो गया है।’ उन्होंने फिर दोहराया कि उन्हें औपचारिक रूप से संन्यास की घोषणा करने की जरूरत नहीं लगी, क्योंकि मैदान से उनकी दूरी खुद ही सब कुछ बता रही थी। साइना ने कहा, ‘धीरे-धीरे लोगों को भी समझ आ जाएगा कि साइना अब नहीं खेल रही है।’

मुझे बस लगा कि मेरा समय पूरा हो गया’

ओलंपिक पदक विजेता साइना ने बताया कि उनके घुटने अब थोड़ी सी ट्रेनिंग भी सहन नहीं कर पा रहे थे, जिससे यह फैसला लेना मजबूरी बन गया। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगा कि संन्यास की घोषणा करना इतनी बड़ी बात है। मुझे बस लगा कि मेरा समय पूरा हो गया है, क्योंकि मेरा घुटना पहले की तरह साथ नहीं दे रहा था।’ साइना ने आगे बताया, ‘दुनिया का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनने के लिए रोज 8–9 घंटे ट्रेनिंग करनी पड़ती है लेकिन मेरा घुटना अब 1–2 घंटे में ही जवाब देने लगा था। सूजन आ जाती थी और उसके बाद ट्रेनिंग करना बहुत मुश्किल हो जाता था। तब मुझे लगा कि अब बस बहुत हो गया है, मैं इसे और आगे नहीं बढ़ा सकती।’


साइना के करियर पर 2016 रियो ओलंपिक में लगी गंभीर घुटने की चोट का गहरा असर पड़ा। हालांकि, उन्होंने जोरदार वापसी करते हुए 2017 वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक और 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता, लेकिन बार-बार घुटने की परेशानी उनके खेल में रुकावट बनती रही। 2024 में साइना ने खुद बताया था कि उन्हें घुटनों में अर्थराइटिस है और उनकी कार्टिलेज खत्म हो चुकी है, जिससे शीर्ष स्तर पर खेलने लायक ट्रेनिंग करना बेहद मुश्किल हो गया है।

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