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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिसः मेला प्रशासन ने शंकराचार्य पदनाम के उपयोग पर स्पष्टीकरण मांगा

गंगा में पवित्र स्नान से रोके जाने को लेकर उठा विवाद गहराया, अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर के बाहर धरना शुरू कर दिया है और मेला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से माफी की मांग की है।

By डॉ. अभिज्ञात

Jan 20, 2026 12:37 IST

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश): प्रयागराज में गंगा में पवित्र स्नान से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को रोके जाने को लेकर उठे विवाद के बीच मेला प्रशासन ने उन्हें नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि वे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य की उपाधि का उपयोग किस आधार पर कर रहे हैं।

मालूम हो कि रविवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब मौनी अमावस्या के अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने समर्थकों के साथ संगम में स्नान के लिए जा रहे थे और आरोप है कि पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस घटना के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर के बाहर धरना शुरू कर दिया, भोजन और पानी त्याग दिया तथा मेला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से माफी की मांग की। यह विरोध प्रदर्शन अब भी जारी है।

सोमवार को प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दयानंद प्रसाद द्वारा जारी नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक सिविल अपील का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें अदालत ने आदेश दिया है कि अपील के निपटारे तक किसी भी धार्मिक नेता को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य अभिषिक्त नहीं किया जा सकता।

नोटिस में कहा गया है कि वर्तमान स्थिति से यह स्पष्ट है कि किसी भी धार्मिक नेता को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य अभिषिक्त नहीं किया गया है, इसके बावजूद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज माघ मेला 2025–26 में अपने शिविर में लगे बोर्ड पर स्वयं को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य घोषित किया है। नोटिस में कहा गया, “आपका यह कृत्य/प्रदर्शन माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना को दर्शाता है। इस पत्र की प्राप्ति के 24 घंटे के भीतर स्पष्ट करें कि आप अपने नाम के साथ ‘शंकराचार्य’ शब्द का उपयोग किस आधार पर कर रहे हैं।”

नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने दावा किया कि महाराज जी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले ही ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य अभिषिक्त किया जा चुका था। योगीराज का कहना है कि मौनी अमावस्या के स्नान पर्व पर स्वामी जी अपने समर्थकों के साथ पालकी में बैठकर शांतिपूर्वक संगम स्नान के लिए जा रहे थे तभी पुलिस ने उनसे पालकी से उतरकर स्नान घाट की ओर जाने को कहा।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब स्वामी जी ने पालकी से उतरने से इनकार किया तो पुलिस ने उनके समर्थकों के साथ मारपीट की, जिसमें करीब 15 लोग घायल हो गए। योगीराज ने कहा कि सभी घायलों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया है और स्वामी जी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कराएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक मेला प्रशासन माफी नहीं मांगता और प्रोटोकॉल के अनुसार स्नान की व्यवस्था नहीं करता तब तक स्वामी जी अपने शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे।

मेला अधिकारी ऋषिराज ने दावा किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थकों ने बैरिकेड तोड़कर संगम नोज तक पहुंचने की कोशिश की थी और भगदड़ जैसी स्थिति को रोकने के लिए प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने कहा, “रविवार को बैरिकेड तोड़कर वे संगम नोज तक पहुंच गए थे। मुख्य स्नान पर्व के दिन किसी भी तरह की भगदड़ को रोकने के लिए प्रशासन ने कार्रवाई की। हमारे पास इसके प्रमाण हैं और मुख्य स्नान पर्व के दिन किसी भी परिस्थिति में वाहनों की अनुमति नहीं थी।”

उन्होंने यह भी कहा कि स्वामी जी के शिविर के आसपास ठहरे कई साधु-संतों ने उसी दिन पवित्र स्नान किया। किसी भी संत का अपमान नहीं किया गया। श्रद्धालुओं और कल्पवासियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए उनके लिए की गई व्यवस्थाओं को सख्ती से लागू किया गया।

इस बीच कांग्रेस ने सोमवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ कथित “दुर्व्यवहार” को लेकर भाजपा पर तीखा हमला किया और इसे “शर्मनाक घटना” बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग की।

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