नई दिल्ली : भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) पहले ही बोर्ड से अनुबंधित सभी क्रिकेटरों को कड़ा संदेश दे चुका है कि जो खिलाड़ी भारतीय टीम के साथ नहीं हैं या अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेल रहे हैं उन्हें घरेलू टूर्नामेंट में हिस्सा लेना अनिवार्य होगा। हालांकि हालिया कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस नियम से विराट कोहली को छूट दी जा सकती है।
न्यूज़ीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में भारत को 2–1 से हार का सामना करना पड़ा। राजकोट और इंदौर में हार के बावजूद विराट कोहली ने बल्ले से प्रशंसकों को निराश नहीं किया। पूरी सीरीज में उनका प्रदर्शन एक बार फिर साबित करता है कि वह क्यों भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े नामों में से एक हैं।
इसी बीच कोहली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दो फॉर्मेट से संन्यास ले चुके हैं और अब केवल वनडे खेलते हैं। इस फॉर्मेट में वह पूरी तरह अनुभवी खिलाड़ी हैं रनों के मामले में वह दूसरे स्थान पर हैं और शतकों की संख्या में शीर्ष पर।
कोहली को लेकर कैफ़ का मजेदार बयान
न्यूज़ीलैंड के खिलाफ शानदार प्रदर्शन के बाद पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने विराट कोहली की जमकर तारीफ की। उन्होंने मैच के नतीजे से ज़्यादा कोहली की निरंतरता और मानसिक मजबूती को महत्व दिया। कैफ का कहना है कि कोहली अब नियमित रूप से भारत में नहीं रहते। वह भारत आते हैं रन बनाते हैं और फिर वापस लंदन लौट जाते हैं। इसके बावजूद इतने कम मैच खेलकर लगातार रन बनाना बिल्कुल आसान नहीं और यही बात कोहली को दूसरों से अलग बनाती है।
अपने यूट्यूब चैनल पर कैफ ने कहा कि विराट अब ऐसे क्रिकेटर हैं जिन्हें कभी-कभार देखा जाता है। वह आते हैं, रन बनाते हैं और फिर लंदन लौट जाते हैं। नियमित रूप से न खेलते हुए भी इतना निरंतर बने रहना आसान नहीं है लेकिन उसकी फिटनेस देश के लिए खेलने का गर्व, खेल की समझ और तैयारी उसे खास बनाती है।
क्या घरेलू क्रिकेट न खेलना भी चलेगा?
कैफ के मुताबिक अब कोहली को घरेलू क्रिकेट खेलने की जरूरत नहीं है। वह चाहते हैं कि BCCI कोहली को विशेष दर्जा दे जैसा पहले जसप्रीत बुमराह को मिला था। न्यूज़ीलैंड के खिलाफ तीन मैचों में कोहली ने 240 रन बनाए औसत 80 रहा और स्ट्राइक रेट लगभग 115 था। भारत के लिए हाल के मैचों में उनकी पारियां इसका सबूत हैं।
कैफ ने आगे कहा कि अब उसे घरेलू क्रिकेट खेलने की जरूरत नहीं है। मैच प्रैक्टिस तो कई खिलाड़ियों को मिल जाती है लेकिन विराट जैसी भावना और भूख बाजार में नहीं मिलती। आखिरी मैच में भी वही भरोसे का नाम था। विराट अकेले दम पर दस खिलाड़ियों के खिलाफ मैच जिता सकता है।