T20 वर्ल्ड कप 2026 से बांग्लादेश का चैप्टर आज खत्म हो गया। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) अंतिम फैसला सुनाते हुए टीम को टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया। ICC पहले ही यह साफ कर चुका था कि बांग्लादेश को अपने मैच भारत में ही खेलने होंगे। T20 वर्ल्ड कप से बाहर होने का खतरा होने के बावजूद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड अपनी जिद पर अड़ा रहा और कहा कि वह सुरक्षा कारणों से भारत नहीं आएगा।
बांग्लादेश ने ICC से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने आईसीसी की विवाद समाधान समिति (DRC) को पत्र लिखा। टी20 वर्ल्ड कप में उसके मैच ना शिफ्ट करने पर ग्रुप बदलने की मांग भी की। आईसीसी ने उसकी सारी मांग को ठुकराते हुए भारत में खेलने को कहा। ICC ने शनिवार को आखिरी फैसला लेते हुए बांग्लादेश को बाहर कर उसकी जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में जगह दे दी।
BCB को भारी नुकसान का करना पड़ेगा सामना
पीटीआई की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर बांग्लादेश टी20 वर्ल्ड कप में नहीं खेलता है, तो बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) को करीब 27 मिलियन डॉलर यानी लगभग 240 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। इस टूर्नामेंट से मिलने वाली ब्रॉडकास्टिंग कमाई BCB की सालाना आय का करीब 60 प्रतिशत है। इसके अलावा, खिलाड़ियों को भी मोटी कमाई का नुकसान होगा।
बांग्लादेश पर कड़े एक्शन की तैयारी
न्यूज एजेंसी ANI की एक रिपोर्ट के अनुसार अगर बांग्लादेश 2026 T20 वर्ल्ड कप के लिए भारत आने पर सहमत नहीं होता है, तो ICC चेयरमैन जय शाह उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने पर विचार कर रहे हैं. सूत्रों ने बताया कि ICC चेयरमैन इस मुद्दे पर अंतिम फैसले के लिए फिलहाल दुबई में हैं।
बांग्लादेश की आखिरी कोशिश भी नाकाम
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की अगले महीने होने वाले T20 वर्ल्ड कप से बाहर होने से बचने की आखिरी कोशिश भी नाकाम हो गई। ICC ने BCB की उस अपील को खारिज कर दिया, जो उसने ICC के डिस्प्यूट रिज़ॉल्यूशन कमेटी (DRC) में दायर की थी। इस अपील में BCB ने भारत में खेलने से इनकार करने के ICC के फैसले को चुनौती दी थी। खेल मंत्रालय के सरकारी सलाहकार आसिफ नजरुल के निर्देश पर BCB ने ICC की DRC को ईमेल भेजकर आरोप लगाया कि भारत से मैच हटाकर श्रीलंका में कराने की उनकी मांग को ठुकराकर ICC बोर्ड ने उनके साथ अन्याय किया है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक BCB ने ICC को आधिकारिक तौर पर यह लिखकर नहीं बताया कि वह भारत में नहीं खेलेगा, जबकि ICC बोर्ड ने बुधवार को उन्हें 24 घंटे का समय दिया था।
स्कॉटलैंड की टूर्नामेंट में एंट्री तय
PTI की रिपोर्ट में कहा गया है कि स्कॉटलैंड को वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने के लिए स्टैंडबाय पर रखा गया है, और उन्हें शनिवार यानी आज कन्फर्मेशन मिल जाएगा।
कैसे काम करती है DRC ?
आईसीसी की DRC ब्रिटिश कानून के तहत काम करती है। माइकल बेलॉफ के नेतृत्व में इसका एक चर्चित फैसला 2018 में आया था। समिति ने तब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड द्वारा बीसीसीआई के खिलाफ दायर सात करोड़ डॉलर के मुआवजे के दावे को खारिज कर दिया था। यह दावा पाकिस्तान में द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेलने को लेकर किया गया था। उस फैसले में डीआरसी ने कहा था कि जिसे पीसीबी ‘समझौता ज्ञापन’ बता रहा था, वह दरअसल केवल एक आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) था। यह बीसीसीआई पर बाध्यकारी नहीं था। डीआरसी का काम यह यह जांच करना होता है कि आईसीसी बोर्ड ने नियमों और कानूनों का पालन किया है या नहीं। यह अपील सुनने वाली संस्था नहीं है। माइकल बेलॉफ के अलावा इस 11 सदस्यीय समिति में माइक हीरॉन, जस्टिस विंस्टन एंडरसन, स्वतंत्र वकील डिऑन वैन जाइल, गैरी रॉबर्ट्स, गुओ काई, एनाबेल बेनेट, जीन पॉलसन, पीटर निकोलसन, विजय मल्होत्रा और सैली क्लार्क शामिल हैं।
DRC के पास पहुंचा बीसीबी
ICC ने भले ही स्कॉटलैंड को ‘स्टैंडबाय’ पर रखा हो, लेकिन पूरी तरह घिर जाने के बाद अमीनुल इस्लाम बुलबुल के नेतृत्व वाला बीसीबी आखिरी विकल्प के तौर पर आईसीसी की डीआरसी के पास पहुंचा। इस समिति के अध्यक्ष इंग्लैंड के माइकल बेलॉफ (किंग्स काउंसिल) हैं। बीसीबी के एक सूत्र ने गोपनीयता की शर्त पर पीटीआई से कहा, ‘हां, बीसीबी ने डीआरसी का रुख किया है, क्योंकि वह अपने सभी विकल्प आजमाना चाहता है। अगर डीआरसी बीसीबी के खिलाफ फैसला देती है तो फिर एकमात्र मंच स्विट्जरलैंड स्थित खेल पंचाट (CAS) ही बचेगा।’