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डीआरडीओ में बड़ा बदलाव, डॉ. जगन्नाथ नायक बने मिसाइल एवं रणनीतिक प्रणाली के महानिदेशक

डीआरडीओ में बड़ा बदलाव, डॉ. जगन्नाथ नायक बने मिसाइल एवं रणनीतिक प्रणाली के महानिदेशक 35 वर्षों के रक्षा अनुसंधान अनुभव वाले वैज्ञानिक को मिली नई जिम्मेदारी।

By डॉ. अभिज्ञात

Jun 30, 2026 21:56 IST

हैदराबाद: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जगन्नाथ नायक को महानिदेशक (मिसाइल एवं रणनीतिक प्रणाली) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होगी। यह नियुक्ति यू. राजा बाबू के सेवानिवृत्त होने के बाद की गई है।


35 वर्षों का रक्षा अनुसंधान का अनुभव

डीआरडीओ की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, डॉ. जगन्नाथ नायक वर्तमान में सेंटर फॉर हाई एनर्जी सिस्टम्स एंड साइंसेज (सीएचईएसएस) के निदेशक और विशिष्ट वैज्ञानिक हैं। उन्हें रक्षा अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में 35 वर्ष से अधिक का अनुभव है।


स्वदेशी रक्षा तकनीकों के विकास में निभाई अहम भूमिका

डॉ. नायक रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए उन्नत एवियोनिक्स प्रणालियों के स्वदेशी डिजाइन एवं विकास के लिए जाने जाते हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने कई महत्वपूर्ण रक्षा तकनीकों के विकास में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।


भारत की पहली डायरेक्टेड एनर्जी वेपन प्रणाली विकसित की

सीएचईएसएस के निदेशक के रूप में उन्होंने भारत की पहली डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (डीईडब्ल्यू) प्रणाली के विकास, फील्ड परीक्षण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) का नेतृत्व किया। इसे भविष्य की रक्षा तकनीकों की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जाता है।


आकाश मिसाइल और एंटी-ड्रोन प्रणाली में महत्वपूर्ण योगदान

डॉ. नायक आकाश मिसाइल के लिए फाइबर ऑप्टिक जाइरो (एफओजी) आधारित गाइडेंस प्रणाली और डीईडब्ल्यू आधारित एंटी-ड्रोन प्रणाली के प्रमुख वास्तुकार माने जाते हैं। उन्होंने रिसर्च सेंटर इमारत (आरसीआई), हैदराबाद में परियोजना निदेशक रहते हुए फाइबर ऑप्टिक जाइरोस्कोप के स्वदेशी विकास का नेतृत्व किया। इस तकनीक के जरिए भारत मिसाइलों, लड़ाकू विमानों और मुख्य युद्धक टैंकों में उपयोग होने वाली इस महत्वपूर्ण प्रणाली में आत्मनिर्भर बना।


उच्च शिक्षा और शैक्षणिक योगदान

डॉ. जगन्नाथ नायक ने भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु से इलेक्ट्रिकल कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में एमएस और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। वर्ष 2009 से 2014 तक वे आईआईएससी बेंगलुरु और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास में विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर भी रहे।उन्होंने 125 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं, कई पुस्तकें लिखी हैं और 10 से अधिक पीएचडी शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया है।


कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित

डॉ. नायक को आर्यभट्ट पुरस्कार, नेशनल एरोनॉटिकल प्राइज, डीआरडीओ अग्नि अवॉर्ड फॉर एक्सीलेंस इन सेल्फ रिलायंस, नीना सक्सेना एक्सीलेंस इन टेक्नोलॉजी अवॉर्ड तथा एरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया स्वर्ण जयंती पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।


कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़े

डॉ. जगन्नाथ नायक इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग (आईएनएई), ऑप्टिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (ओएसआई) और इंस्टीट्यूशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर्स (आईईटीई) के फेलो हैं। इसके अलावा वे रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ नेविगेशन (यूके) के एसोसिएट फेलो, ऑप्टिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया तथा सेंसर रिसर्च सोसाइटी ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष और आईएनएई हैदराबाद चैप्टर के सचिव भी हैं।

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