कच्छ (गुजरात) : लगभग 40,000 मीट्रिक टन तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर भारतीय गैस वाहक जहाज ‘शिवालिक’ सोमवार शाम गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुँच गया। जहाज बीती रात देर से या सोमवार तड़के होर्मुज़ जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार करने के बाद बंदरगाह पर पहुँचा।
बंदरगाह पर प्राथमिकता से बर्थिंग की व्यवस्था
नई दिल्ली में पश्चिम एशिया की हालिया स्थिति पर आयोजित अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि ‘शिवालिक’ से माल उतारने की प्रक्रिया में किसी तरह की देरी न हो, इसके लिए मुंद्रा बंदरगाह पर दस्तावेजी औपचारिकताएँ पूरी कर ली गई हैं और जहाज को प्राथमिकता के आधार पर बर्थिंग की व्यवस्था दी गई है।
एक और एलपीजी जहाज ‘नंदा देवी’ कल पहुंचेगा
शिपिंग मंत्रालय के अधिकारी ने जानकारी दी कि एलपीजी लेकर आने वाला एक अन्य भारतीय जहाज ‘नंदा देवी’ मंगलवार को बंदरगाह पर पहुँचेगा।
कच्चा तेल लेकर आ रहा जहाज ‘जग लाडकी’ सुरक्षित मार्ग पर
सिन्हा ने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात से लगभग 81,000 टन मुरबन कच्चा तेल लेकर रवाना हुआ भारतीय ध्वज वाला जहाज ‘जग लाडकी’ भी सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में किसी भी प्रकार की घटना की सूचना नहीं मिली है। वर्तमान में फारस की खाड़ी में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं, जिन पर कुल 611 नाविक तैनात हैं।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए ईरान से संवाद जारी
इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए होर्मुज़ जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात को फिर से सुचारु बनाने के उद्देश्य से तेहरान के साथ सीधे संवाद को सबसे प्रभावी तरीका बताया था। ब्रिटेन के अखबार फाइनेंसियल टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत संभालता है और इसे फिर से खोलने के लिए भारत फिलहाल ईरान के साथ बातचीत कर रहा है। जयशंकर ने कहा कि इस दिशा में चल रही बातचीत से कुछ सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। उनके अनुसार भारत के लिए तेहरान के साथ तर्कपूर्ण संवाद और समन्वय के माध्यम से समाधान निकालना अधिक व्यावहारिक है। उन्होंने ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ के पारगमन को इस कूटनीतिक रणनीति की व्यावहारिक सफलता का उदाहरण बताया। इन दोनों टैंकरों में कुल मिलाकर लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लदी हुई है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी सभी भारतीय ध्वज वाले जहाजों के लिए कोई व्यापक व्यवस्था नहीं बनी है और फिलहाल जहाजों के पारगमन को “मामला-दर-मामला” के आधार पर अनुमति दी जा रही है।
ईरान की शर्तों के साथ खुला है जलडमरूमध्य
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुला है, लेकिन उन देशों और उनके सहयोगियों के लिए बंद है जिन्हें ईरान अपने खिलाफ आक्रामक कार्रवाई करने वाला मानता है। वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही विशेष शर्तों के तहत होगी। उनके अनुसार क्षेत्र में असुरक्षा की स्थिति अमेरिका और इज़राइल की गतिविधियों के कारण बनी है। इस मार्ग की निगरानी ईरान की सशस्त्र सेनाएँ कर रही हैं और किसी भी देश को इसका उपयोग ईरान के खिलाफ हमले के लिए करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।