भारतीय रसोई में पराठों का एक खास स्थान है और जब बात गोभी के पराठे की आती है तो स्वाद अपने चरम पर पहुंच जाता है। उत्तर भारत में यह व्यंजन केवल भोजन नहीं बल्कि रोजमर्रा की ज़िंदगी और मेहमाननवाजी का अहम हिस्सा माना जाता है। सुबह के नाश्ते से लेकर रात के भोजन तक गोभी का पराठा हर समय पसंद किया जाता है। मक्खन, दही, अचार या चटनी के साथ परोसा गया यह पराठा साधारण सामग्री से बनकर भी बेहद खास बन जाता है।
गोभी के पराठे की खासियत इसकी भरावन में छिपी होती है। ताजी फूलगोभी को बारीक कद्दूकस कर उसमें अदरक, हरी मिर्च और सुगंधित मसालों का संतुलन मिलाया जाता है। जब यह मिश्रण हल्की आंच पर पकता है तो गोभी की कच्ची गंध खत्म हो जाती है और मसालों का स्वाद उसमें अच्छी तरह समा जाता है। आमचूर और गरम मसाला पराठे को हल्की खटास और गहराई देते हैं जिससे हर कौर लाजवाब लगता है।
पराठे का आटा भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। गेहूं के आटे में थोड़ा सा तेल और नमक मिलाकर गूंथा गया नरम आटा पराठों को मुलायम और स्वादिष्ट बनाता है। आटे को कुछ देर आराम देने से उसमें लचीलापन आता है जिससे बेलते समय पराठा फटता नहीं और भरावन अच्छी तरह बंद रहती है। सही तरीके से आटा तैयार करना अच्छे पराठे की पहली सीढ़ी है।
पराठे बनाते समय भरावन को बीच में रखकर किनारों को सावधानी से मोड़ना एक कला है। इसके बाद हल्के हाथ से बेलकर तवे पर सेंकना जरूरी होता है। गरम तवे पर घी या तेल के साथ सेंके गए पराठे बाहर से सुनहरे और अंदर से नरम बनते हैं। धीमी और मध्यम आंच पर सेंकने से पराठा अच्छी तरह पकता है और उसका स्वाद निखर कर आता है।
गोभी का पराठा सिर्फ स्वाद में ही नहीं पोषण में भी समृद्ध होता है। गोभी में फाइबर, विटामिन और खनिज पाए जाते हैं जो पाचन के लिए लाभकारी हैं। गेहूं का आटा ऊर्जा देता है जबकि मसाले भोजन को सुपाच्य बनाते हैं। यही वजह है कि यह पराठा बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है।
घर पर बने गरमा गरम गोभी के पराठे जब दही, मक्खन या अचार के साथ परोसे जाते हैं तो साधारण भोजन भी एक खास अनुभव बन जाता है। यही सादगी और स्वाद का मेल गोभी के पराठे को हर भारतीय रसोई का पसंदीदा व्यंजन बनाता है।