वाशिंगटनः क्या रात के अंधेरे में किसी देश के राष्ट्रपति को उठाकर ले आना आसान बात है? नहीं इसके लिए तैयारी चाहिए। बिल्कुल सटीक योजना बनानी पड़ती है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के लिए भी अमेरिका लंबे समय से चालें बिछा रहा था। जमीन तैयार कर चुका था। उसके बाद शनिवार तड़के 150 विमानों के साथ अमेरिकी सेना वेनेजुएला रवाना हुई। नाम था- ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’।
अमेरिकी सेना के इस सैन्य अभियान की पूरी तस्वीर अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। शायद कभी होगी भी नहीं लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन के बयानों से टुकड़ों में जो तस्वीर सामने आई है वह सिर्फ रोमांचक ही नहीं बल्कि हॉलीवुड की स्पाई थ्रिलर को भी पीछे छोड़ देती है।
अभियान की तैयारी
करीब चार महीने पहले की बात है। तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला पर एक के बाद एक प्रतिबंध लगा रहे थे। कैरिबियन सागर में बड़ी संख्या में युद्धपोत और पनडुब्बियाँ तैनात की जा रही थीं। माहौल ऐसा था मानो युद्ध छिड़ने वाला हो लेकिन यह सब दिखावा था। उसी समय भीतर ही भीतर ट्रंप कुछ और तैयारी कर रहे थे। ठीक कब से यह कहना मुश्किल है।
सबसे पहले मादुरो के सेफ हाउस (हमले की स्थिति में जहाँ वे छिपते हैं) की हूबहू एक प्रतिकृति बनाई गई। इसके बाद अमेरिकी डेल्टा फोर्स समेत एलीट बलों के सदस्यों ने अभ्यास शुरू किया वे मादुरो के महल में कैसे घुसेंगे, किस दिशा से हमला होगा सब कुछ।
मादुरो की हर जानकारी अमेरिका के हाथ में
बताया जा रहा है कि पिछले अगस्त में ही CIA की एक टीम वेनेजुएला की राजधानी कराकास में डेरा डाल चुकी थी। मादुरो रोज क्या करते हैं उनकी दिनचर्या क्या है सारी जानकारी जुटाई गई। इतना ही नहीं राष्ट्रपति से जुड़े कई गोपनीय तथ्य खुद मादुरो के एक करीबी व्यक्ति ने CIA को सौंपे।
ट्रंप की हरी झंडी
चार दिन पहले ट्रंप ने अभियान को हरी झंडी दी। अमेरिकी समयानुसार रात 10:46 बजे मिशन शुरू हुआ। फ्लोरिडा के पाम बीच स्थित मार-ए-लागो में ट्रंप खुद इसकी लाइव स्ट्रीमिंग देखने लगे। अभियान में थल, जल और वायुसेना के जवान शामिल थे। पीछे खुफिया एजेंसियों की एक विशाल टीम थी। जनरल डैन के अनुसार F-22, F-35, F-18, EA-18, E-2, E-1 जैसे 150 बमवर्षक विमान एक साथ रवाना हुए। साथ में रिमोटली पायलटेड ड्रोन और सहायक विमान भी थे।
वेनेजुएला में अमेरिकी सेना की एंट्री
स्थानीय समय के अनुसार रात 2 बजकर 1 मिनट पर अमेरिकी सेना कराकास में दाखिल हुई। एक टीम सीधे मादुरो के महल में उतरी। फ़ॉक्स न्यूज से ट्रंप ने कहा कि सबसे पहले कराकास शहर की बिजली काट दी गई। पूरा ऑपरेशन अंधेरे में किया गया। उनका दावा है कि मादुरो एक किले जैसे महल में रहते हैं और हर समय सुरक्षा घेरा रहता है।
मादुरो के सेफ हाउस में
यही अमेरिकी सेना के लिए असली चुनौती थी। लेकिन महीनों से खुफिया एजेंसियाँ इसी की योजना बना रही थीं। सेफ हाउस तोड़कर मादुरो को बाहर लाने के लिए सेना एक बड़ा ‘ब्लो टॉर्च’ भी लेकर गई थी लेकिन अंततः उसकी जरूरत नहीं पड़ी।
30 मिनट का ऑपरेशन
महल में उतरकर राष्ट्रपति की सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए अमेरिकी सेना ने मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया और विमान में बैठा दिया। ट्रंप के अनुसार वेनेजुएला के राष्ट्रपति, पत्नी के साथ सेफ हाउस में घुस गए थे लेकिन दरवाजा बंद नहीं कर पाए। मात्र 30 मिनट में पूरा मिशन कंप्लीट।
पूरे अभियान में वेनेजुएला में 40 लोगों की मौत हुई जिनमें आम नागरिक भी शामिल हैं। कई लोग घायल हुए। मिशन के बाद ट्रंप ने बताया कि अमेरिका के दो एक लोग घायल हुए हैं लेकिन किसी की मौत नहीं हुई। किसी विमान या सैन्य उपकरण को भी नुकसान नहीं पहुँचा। दुनिया में सिर्फ अमेरिका ही ऐसा अभियान चला सकता है मिशन के बाद गर्व से ट्रंप ने कहा। निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस अब अमेरिका की हिरासत में हैं। उन पर मादक पदार्थों और आतंक से जुड़े आरोपों में मुकदमा चलेगा। कूटनीतिक विश्लेषकों के एक वर्ग का मानना है कि अब सब कुछ ट्रंप के हाथ में है- हाँ, वेनेजुएला का भविष्य भी।