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100 किलो के दाँतों वाला ‘सुपर टास्कर’ क्रेग, अफ्रीका के दिग्गज हाथी का अंत

दाँतों के बोझ से नहीं, उम्र के बोझ से धीरे-धीरे निष्क्रिय हो रहा था।

By शिलादित्य साहा, Posted by रजनीश प्रसाद/राखी मल्लिक

Jan 04, 2026 13:02 IST

केन्या (नैरोबी): उसके कितने ही नाम थे- सुपर टास्कर, बुल एलिफेंट, यहाँ तक कि बीयर एंबेसडर…! सिर्फ नाम ही नहीं उसके दोनों दाँतों का वजन ही लगभग 100 किलो था। भारीपन के कारण वे अक्सर जमीन को छूते रहते थे। इतने विशाल दाँतों वाला हाथी दुनिया में विरला ही होता है। पर्यटकों की गाड़ियाँ देखकर उसकी तरह ‘पोज’ देने वाला और कौन था? पूरे पाँच दशक तक बाढ़-सूखा-महामारी से लेकर बेलगाम शिकारियों तक सभी बाधाओं को पार कर ऐसी ‘बुद्धं शरणं’ जैसी भूमिका में कोई और तो खड़ा नहीं रहा। अभी कुछ दिन पहले तक भी वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर सोशल मीडिया को उसकी तस्वीरों से भर रहे थे।

शनिवार, 3 जनवरी की भोर के बाद सब कुछ इसी जीवन की तरह अतीत हो गया। दुनिया भर के ‘फ़ैन्स’ को रुलाकर केन्या के एंबोसेली नेशनल पार्क की धरती पर 54 वर्ष का ‘लीजेंड’ कहलाने वाला अफ्रीकी दाँतेदार हाथी क्रेग आखिरी साँस ली। दाँतों के बोझ से नहीं, उम्र के बोझ से वह धीरे-धीरे निष्क्रिय हो रहा था।

पिछले नवंबर में एक बार खबर फैली थी कि सुपर टास्कर क्रेग बीमार होकर मर गया है लेकिन उस खबर को अफवाह साबित करते हुए वह फिर स्वस्थ हो उठा था। हालाँकि उसकी पाचन शक्ति बहुत कमजोर हो चुकी थी। पिछले दो दिनों से वह ठीक से खा-पी भी नहीं रहा था।

शनिवार तड़के साढ़े तीन बजे के आसपास वह आखिरी बार जंगल की जमीन पर लेट गया। साथ मौजूद मसाई ट्रैकर्स की हजार पुकारों के बावजूद क्रेग ने आँखें नहीं खोलीं। एंबोसेली ट्रस्ट फॉर एलिफेंट्स की ओर से सुबह यह खबर आते ही सोशल मीडिया पर शोक की लहर दौड़ गई।

एक विशाल हाथी और दो लंबे दाँत क्या इसी समीकरण से क्रेग को दुनिया भर में प्रसिद्धि मिली? बिल्कुल नहीं। पहली बात क्रेग अफ्रीकी बुल एलिफेंट कहलाने वाली उस दुर्लभ पीढ़ी का प्रतिनिधि था जिनके दाँत सचमुच देखने लायक होते हैं। लगभग 50-50 किलो के दो दाँत लेकर चलने वाला हाथी न सिर्फ अफ्रीका में बल्कि एशियाई हाथियों में भी आसानी से नहीं मिलता।

इसके अलावा एंबोसेली के जंगलों में क्रेग के पूर्वज भी बहुत प्रसिद्ध रहे हैं। सुपर टास्कर क्रेग की माँ थी जंगल की मशहूर हथिनी ‘कसांद्रा’ जिसने अपने जीवनकाल में केन्या को कई पीढ़ियाँ दीं। हाथियों के झुंड की इस ‘मातृका’ कसांद्रा की सबसे बड़ी पहचान थे उसके ढीले लटकते कान।

1972 में उसी स्नेहमयी हथिनी की गोद में क्रेग का जन्म हुआ और उसके बाद के 54 वर्षों में एंबोसेली या केन्या ही नहीं पूरे अफ्रीकी महाद्वीप के वन्यजीवन का सबसे बड़ा आकर्षण बन गया क्रेग। यही कारण है कि 2021 में केन्या के प्रसिद्ध बीयर ब्रांड ‘टास्कर’ ने इस बुल एलिफेंट को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया। यहाँ तक कि कुछ लोगों का दावा है कि ईस्ट अफ्रीकन ब्रुअरीज के मालिकों ने बीयर के ब्रांड का नाम भी क्रेग को देखकर ही रखा था।

आम तौर पर दाँतेदार हाथी शांत और स्थिर बुद्धि नहीं होते लेकिन क्रेग का स्वभाव बिल्कुल उलटा था। कभी किसी पर हमला नहीं, पर्यटकों की ओर बेवजह दौड़ना नहीं, अपने झुंड में भी झगड़ा नहीं। जीवन के पचास बसंतों में क्रेग ने भरपूर मस्ती की इसलिए उसके उत्तराधिकारियों की संख्या भी बहुत है। क्रेग की मृत्यु के बाद जारी बयान में अफ्रीका के वन अधिकारियों ने उसके प्रति आभार जताया है दुनिया में विशालकाय बुल एलिफेंट्स के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए।

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