बेंगलुरु : भारत में डिजिटल भुगतान क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों में से एक अब आईपीओ लाने जा रही है। समाचार माध्यमों के अनुसार PhonePe को आईपीओ लाने के लिए सेबी से हरी झंडी मिल गई है। भारत में निर्मित और बेंगलुरु स्थित कंपनी होने के बावजूद PhonePe अब उस अर्थ में पूरी तरह भारतीय कंपनी नहीं है। इसका कारण यह है कि वर्तमान में इस प्लेटफॉर्म के अधिकांश शेयर अमेरिकी बहुराष्ट्रीय रिटेल कंपनी वॉलमार्ट के पास हैं। इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट और टाइगर ग्लोबल जैसी कंपनियों की भी इसमें हिस्सेदारी है।
समाचार माध्यम मिंट के सूत्रों के अनुसार सितंबर में कंपनी की ओर से चुपचाप सेबी के पास ड्राफ्ट दस्तावेज जमा किया गया था। आने वाले कुछ दिनों में कंपनी सेबी के पास अपडेटेड दस्तावेज भी जमा कर सकती है।
यह आईपीओ किस तरह आएगा?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस आईपीओ में कोई फ्रेश इश्यू नहीं होगा। पूरा इश्यू OFS (ऑफर फॉर सेल) के रूप में आएगा। यानी वॉलमार्ट, माइक्रोसॉफ्ट और टाइगर ग्लोबल जैसी कंपनियां अपनी हिस्सेदारी के शेयर बाजार में बेचेंगी। बाजार में चर्चा है कि यह लगभग 12,000 करोड़ रुपये का आईपीओ हो सकता है।
NPCI के आंकड़ों के अनुसार भारत के डिजिटल भुगतान बाजार में UPI लेनदेन के मामले में PhonePe की हिस्सेदारी 45% है। वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का राजस्व 7115 करोड़ रुपये रहा, जो साल-दर-साल आधार पर 40% की वृद्धि दर्शाता है। कंपनी का कैश फ्लो भी पहले की तुलना में बढ़ा है।
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