नई दिल्ली: 2026 का नया साल शुरू होते ही भारतीय शेयर बाजार पर विदेशी निवेशकों के बाहर जाने का दबाव दिखाई देने लगा है। पिछले साल लगातार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के निवेश बाहर निकलने से दलाल स्ट्रीट में गंभीर नुकसान हुआ था। नए साल में भी निवेशकों के बाहर जाने की प्रवृत्ति में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है।
एनएसडीएल (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में विदेशी निवेशकों ने भारत के शेयर बाजार से कुल 1.66 लाख करोड़ रुपये का निवेश निकाला। वहीं, 2026 के कुछ ही दिनों में विदेशी निवेशकों ने 22,530 करोड़ रुपये का निवेश बाहर निकाला है। यह आंकड़ा यह दर्शाता है कि नए साल में भी विदेशी निवेशकों की बेचैनी कम नहीं हुई है।
हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने स्थिति को संभाला। नए साल में डीआईआई ने शेयर बाजार में 34,076 करोड़ रुपये का निवेश किया, जिससे बाजार को गिरावट की मार से कुछ हद तक बचाया जा सका। इस कदम ने विदेशी निवेशकों के बाहर जाने के दबाव को संतुलित करने में मदद की।
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेश बाहर निकलने के पीछे कई वजहें हैं। सबसे बड़ी वजह अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील न बनने को माना जा रहा है, जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने भी विदेशी निवेशकों को बाजार से बाहर निकलने के लिए प्रेरित किया है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि जब तक बाजार में कोई नया सकारात्मक ट्रिगर नहीं आता, विदेशी निवेशकों का बाहर निकलना जारी रह सकता है। हालांकि, कुछ विश्लेषक उम्मीद कर रहे हैं कि 2026 के मध्य तक इस प्रवृत्ति में बदलाव देखने को मिल सकता है, खासकर अगर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू आर्थिक संकेत बेहतर रहें।
निवेशकों और विशेषज्ञों की नजर अब 2026 के पहले तिमाही के परिणामों और किसी संभावित अंतरराष्ट्रीय समझौते पर टिकी हुई है। इससे ही यह तय होगा कि भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश लौटता है या बाहर निकलने की प्रवृत्ति जारी रहती है।