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हफ्ते की शुरुआत में शेयर बाजार लड़खड़ाया, निवेशकों की बढ़ी चिंता

सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट, विदेशी बिकवाली और वैश्विक तनाव ने बढ़ाया दबाव।

By अंशुमान गोस्वामी, श्वेता सिंह

Jan 19, 2026 18:02 IST

मुंबईः हफ्ते की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोर रही। सोमवार को सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों ही गिरावट के साथ खुले और दिन के दौरान दबाव में रहे। हालांकि कारोबार के अंतिम सत्र में कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद बाजार लाल निशान में बंद हुआ। इस गिरावट के चलते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 2.42 लाख करोड़ रुपये घट गया।

सोमवार के कारोबार में सेंसेक्स इंट्राडे में 629 अंकों तक गिर गया था, हालांकि बाजार बंद होने पर यह 324 अंक या 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 83,246 अंकों पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 भी दबाव में रहा। दिन के दौरान यह 25,585 अंकों तक फिसला, लेकिन अंत में 109 अंक या 0.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।

बेंचमार्क इंडेक्स के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का मिडकैप इंडेक्स 0.43 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 1.28 प्रतिशत गिरा। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो ज्यादातर सेक्टर लाल निशान में रहे। हालांकि एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर में हल्की मजबूती देखी गई।

बाजार में इस गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण बताए जा रहे हैं।

पहला बड़ा कारण अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ से जुड़ी धमकी है। ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप ने आठ यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि 1 फरवरी से इन देशों के सामान पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा, जो 1 जून से बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाएगा। इस बयान के बाद यूरोप में जवाबी कार्रवाई की चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है और इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है।

दूसरा कारण कंपनियों के तिमाही नतीजे हैं। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में भारतीय कंपनियों के नतीजे उम्मीद के मुताबिक मजबूत नहीं रहे। खासकर आईटी और बैंकिंग जैसे बड़े सेक्टरों में तेज ग्रोथ नहीं दिखी। वैश्विक तनाव के माहौल में इन कमजोर नतीजों ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है।

तीसरा बड़ा दबाव विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से आया है। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने जनवरी महीने में अब तक नकद बाजार से 22,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेच दिए हैं। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, विदेशी निवेशक पिछले साल जुलाई से लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है।

चौथा कारण बजट से पहले निवेशकों की सतर्कता है। 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया जाना है, ऐसे में निवेशक बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं। बाजार को आशंका है कि अगर सरकार पूंजीगत खर्च पर ज्यादा जोर देती है, तो अन्य सरकारी खर्चों में कटौती हो सकती है, जिसका असर आर्थिक विकास पर पड़ सकता है।

पांचवां कारण सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ता रुझान है। अनिश्चितता के माहौल में निवेशक जोखिम से बचते हुए सोने और चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों में निवेश कर रहे हैं। इसके चलते सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। फरवरी गोल्ड फ्यूचर्स करीब 2.2 प्रतिशत बढ़कर 1,45,500 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया, जबकि चांदी की कीमत पहली बार 3 लाख रुपये प्रति किलो के पार चली गई।

कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव, कमजोर तिमाही नतीजे, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बजट से पहले की अनिश्चितता ने मिलकर शेयर बाजार पर दबाव बनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों और बजट से जुड़े फैसलों पर निर्भर करेगी।

(समाचार एइ समय कहीं भी निवेश की सलाह नहीं देता है। शेयर बाजार या किसी भी निवेश में जोखिम होता है। निवेश से पहले उचित अध्ययन और विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। यह खबर केवल शैक्षणिक और जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।)

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