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बजट 2026 में डिफेंस सेक्टर पर बड़ा दांव? जेफरीज को इन तीन कंपनियों से सबसे ज्यादा उम्मीद

घरेलू उत्पादन से लेकर ग्लोबल डिमांड तक, डिफेंस सेक्टर में दिख रहा मजबूत आउटलुक।

By अंशुमान गोस्वामी, Posted by: श्वेता सिंह

Jan 23, 2026 13:10 IST

मुंबईः आगामी केंद्रीय बजट को लेकर डिफेंस सेक्टर एक बार फिर निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के फोकस में है। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज का मानना है कि फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के बजट में डिफेंस सेक्टर के लिए एलोकेशन पिछले साल के मुकाबले काफी बढ़ सकता है। इसी वजह से जेफरीज ने डिफेंस सेक्टर की तीन कंपनियों हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और डेटा पैटर्न्स पर खास नजर रखने की सलाह दी है।

अलग-अलग ब्रोकरेज फर्मों के एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगले केंद्रीय बजट में डिफेंस सेक्टर को विशेष अहमियत मिल सकती है। बीते कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ा है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद केंद्र सरकार ने देश की डिफेंस तैयारियों को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इन पहलों का असर 2026 के बजट में साफ तौर पर दिखाई दे सकता है।

जेफरीज का कहना है कि डिफेंस सेक्रेटरी के हालिया बयानों से संकेत मिलते हैं कि फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में डिफेंस बजट का एलोकेशन पिछले वर्ष की तुलना में काफी बढ़ाया जा सकता है। मौजूदा वैश्विक तनाव के माहौल में मोदी सरकार डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। इसी उद्देश्य से देश के भीतर प्रोडक्शन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। कई सरकारी कंपनियां पहले से ही स्वदेशी तकनीक के जरिए हथियार और डिफेंस इक्विपमेंट बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

जेफरीज की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले समय में भारत का री-आर्ममेंट प्रोसेस तेज होने की संभावना है। यह प्रक्रिया फिस्कल ईयर 2027 में और रफ्तार पकड़ सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि HAL ब्रोकरेज की टॉप पिक है, इसके बाद BEL और डेटा पैटर्न्स का नंबर आता है। जेफरीज का मानना है कि डिफेंस सेक्टर में कैपिटल एलोकेशन बढ़ रहा है, प्रोजेक्ट्स का एग्जीक्यूशन मजबूत हो रहा है और एक्सपोर्ट के अवसर भी धीरे-धीरे बढ़ते जा रहे हैं।

फिस्कल ईयर 2026 के बजट में डिफेंस कैपिटल सेक्टर के लिए करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये का एलोकेशन किया गया था। इसमें से लगभग 62 फीसदी खर्च अप्रैल से नवंबर के बीच हो चुका है। पिछले कुछ वर्षों में इसी अवधि के दौरान खर्च की दर 41 से 54 फीसदी के बीच रही थी। हालांकि नवंबर 2025 में मंथली खर्च पिछले साल की तुलना में 13 फीसदी कम रहा, लेकिन अप्रैल से नवंबर की अवधि में कुल कैपेक्स में साल-दर-साल 57 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार डिफेंस सेक्रेटरी ने संकेत दिया है कि फिस्कल ईयर 2027 में डिफेंस बजट में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। इसका उद्देश्य ऑपरेशनल तैयारी बनाए रखना और आत्मनिर्भरता को और मजबूत करना है। डिफेंस मंत्रालय ने अगले कुछ वर्षों में कैपिटल खर्च में सालाना 17 से 18 फीसदी की वृद्धि का लक्ष्य भी तय किया है। इसके चलते कुल डिफेंस खर्च को GDP के करीब 2.5 फीसदी तक बढ़ाने की योजना है, जो फिलहाल 2 फीसदी से कम है।

डिफेंस सेक्टर अब केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि एक्सपोर्ट भी इसकी एक बड़ी ड्राइविंग फोर्स बनकर उभरा है। जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल अब तक डिफेंस एक्सपोर्ट 3.3 बिलियन डॉलर के टारगेट का करीब 87 फीसदी हासिल कर चुका है। भारत ने वर्ष 2030 तक डिफेंस एक्सपोर्ट को 5,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जबकि फिस्कल ईयर 2025 में यह आंकड़ा करीब 23,600 करोड़ रुपये था।

डिप्लोमेसी और कमर्शियल पहलों के जरिए भी नए अवसर खुल रहे हैं। संभावित भारत-यूरोपीय संघ ट्रेड एग्रीमेंट में सिक्योरिटी और डिफेंस पार्टनरशिप को शामिल किया जा सकता है, जिससे भारतीय कंपनियों को यूरोप के SAFE प्रोग्राम में हिस्सा लेने का मौका मिलेगा। इसके अलावा जनवरी 2026 में यूनाइटेड अरब अमीरात के साथ स्ट्रेटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप को लेकर एक लेटर ऑफ इंटेंट पर साइन किया गया है। जापान, अफ्रीका, इटली और यूनाइटेड किंगडम के साथ भी बातचीत को आगे बढ़ाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मिडिल ईस्ट और एशिया के कई देशों में ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल, पिनाका रॉकेट और आर्टिलरी सिस्टम जैसे भारतीय डिफेंस इक्विपमेंट की मांग बढ़ रही है। कुल मिलाकर बाजार विश्लेषकों का मानना है कि बजट से पहले भारतीय डिफेंस सेक्टर निवेशकों की नजर में आया है।

(समाचार एई समय कहीं निवेश की सलाह नहीं देता है। शेयर बाजार और अन्य क्षेत्रों में निवेश जोखिम के अधीन होता है। निवेश से पहले सही अध्ययन करना और विशेषज्ञों की सलाह लेना जरूरी है। यह खबर केवल शैक्षणिक और जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।)

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