नयी दिल्लीः वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में संभावित अमेरिकी हस्तक्षेप या पुनर्गठन भारत के लिए बड़ी आर्थिक और रणनीतिक राहत लेकर आ सकता है। विशेषज्ञों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यदि अमेरिका के नेतृत्व में वेनेजुएला के तेल उद्योग का नियंत्रण या पुनर्गठन होता है तो भारत की करीब 1 अरब अमेरिकी डॉलर की लंबे समय से अटकी रकम निकलने का रास्ता साफ हो सकता है।
भारत कभी वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल का बड़ा खरीदार रहा है और एक समय पर यहां से 4 लाख बैरल प्रतिदिन तक तेल आयात करता था। हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों और बढ़ते अनुपालन जोखिमों के चलते वर्ष 2020 में यह आयात पूरी तरह बंद हो गया।
भारत की सरकारी कंपनी ONGC विदेश लिमिटेड (OVL) वेनेजुएला के सैन क्रिस्टोबल तेल क्षेत्र में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ संयुक्त रूप से संचालन करती है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण जरूरी तकनीक, उपकरण और सेवाएं नहीं मिल पाने से इस क्षेत्र का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ और व्यावसायिक रूप से उपयोगी भंडार लगभग ठप हो गया।
वेनेजुएला सरकार ने वर्ष 2014 तक OVL को मिलने वाले 536 मिलियन डॉलर के लाभांश का भुगतान नहीं किया है। इसके बाद की अवधि के लिए भी ऑडिट की अनुमति न दिए जाने के कारण लगभग इतनी ही राशि का भुगतान अटका हुआ है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि अमेरिकी कार्रवाई के बाद प्रतिबंधों में ढील दी जाती है, तो OVL भारत के गुजरात स्थित ONGC के तेल क्षेत्रों से ड्रिलिंग रिग और अन्य उपकरण वेनेजुएला भेजकर उत्पादन फिर से शुरू कर सकती है। फिलहाल जहां उत्पादन पांच हजार से दस हजार बैरल प्रतिदिन तक सिमट गया है, वहीं बेहतर तकनीक और नए कुओं के साथ यह क्षेत्र अस्सी हजार से 1 लाख बैरल प्रतिदिन तक उत्पादन करने में सक्षम है।
अमेरिकी नियंत्रण की स्थिति में वेनेजुएला से तेल निर्यात दोबारा शुरू होने की संभावना है, जिससे OVL को अपने अटके हुए करीब 1 अरब डॉलर के बकाये की वसूली हो सकती है। इससे पहले OVL ने अमेरिकी एजेंसी OFAC से विशेष लाइसेंस की मांग भी की थी जैसा लाइसेंस शेवरॉन को दिया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी कंपनियों की वापसी के बावजूद भारत जैसी कंपनियों की भूमिका बनी रहेगी, क्योंकि अमेरिका अकेले पूरे क्षेत्र को संभाल नहीं सकता।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, भविष्य में फिर से वेनेजुएला के कच्चे तेल का बड़ा खरीदार बन सकता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, IOC, नयारा एनर्जी, HPCL-मित्तल और मंगलोर रिफाइनरी जैसी भारतीय रिफाइनरियों के पास भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता पहले से मौजूद है।
विश्लेषकों के मुताबिक, वेनेजुएला से तेल आपूर्ति बहाल होने से भारत को मध्य पूर्व पर निर्भरता कम करने, आपूर्ति जोखिम घटाने और कीमतों पर बेहतर सौदेबाजी का मौका मिलेगा। साथ ही इससे वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता आने की भी संभावना है।