नई दिल्ली : देश में विद्युत वाहनों के तेजी से प्रसार और उससे जुड़ी बैटरी के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव दिया है। मंत्रालय के मसौदा दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि भविष्य में विद्युत वाहनों की बैटरी के लिए आधार नंबर की तरह एक विशिष्ट पहचान संख्या शुरू की जा सकती है।
इसके ज़रिये बैटरी के निर्माण से लेकर उसकी अवधि समाप्त होने के बाद नष्ट किए जाने या पुनर्चक्रण योग्य बनाए जाने तक पूरे समय की जानकारी को ट्रैक करना संभव होगा। इस प्रस्तावित व्यवस्था का नाम दिया गया है ‘बैटरी पैक आधार नंबर’ या बीपीएएन।
मसौदा दिशा-निर्देशों के अनुसार देश में किसी भी बैटरी निर्माता कंपनी या आयातक को बाज़ार में उतारी गई या स्वयं के उपयोग के लिए प्रयुक्त प्रत्येक बैटरी के लिए 21 अक्षरों का एक अद्वितीय बीपीएएन आवंटित करना होगा। केवल नंबर आवंटित करना ही पर्याप्त नहीं होगा बल्कि संबंधित बैटरी पैक की नियमित जानकारी या ‘डायनेमिक डाटा’ को निर्धारित सरकारी पोर्टल पर अपलोड करना भी अनिवार्य होगा। यह नंबर ऐसे स्थान पर लगाया जाना चाहिए, जहां वह स्पष्ट रूप से दिखाई दे और आसानी से उपलब्ध हो। साथ ही सामान्य उपयोग के दौरान उसके नष्ट या विकृत होने की संभावना भी न रहे।
प्रस्तावित व्यवस्था में बीपीएएन के माध्यम से बैटरी के कच्चे माल की आपूर्ति, उत्पादन प्रक्रिया, उपयोग अवधि, कार्यक्षमता, रीसाइक्लिंग, पुनः उपयोग या नष्ट किए जाने से जुड़ी सभी जानकारियाँ संचित की जा सकेंगी। मसौदा दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि यदि रीसाइक्लिंग या पुनः उपयोग के योग्य बनाने की प्रक्रिया के कारण बैटरी के गुणों में कोई बदलाव आता है तो उस स्थिति में पुराने नंबर को रद्द कर नया बीपीएएन जारी करना होगा, चाहे यह कार्य वही निर्माता कंपनी करे या कोई अन्य कंपनी।
मंत्रालय के अनुसार इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य विद्युत वाहनों की बैटरी इकोसिस्टम में पारदर्शिता, पर्यावरणीय जवाबदेही और टिकाऊ व्यवस्था सुनिश्चित करना है। विशेष रूप से ‘सेकंड लाइफ’ उपयोग के मामले में बीपीएएन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, ऐसा माना जा रहा है। इसके साथ ही पर्यावरणीय प्रभाव के आकलन, नियामक संस्थाओं द्वारा निर्धारित गुणवत्ता मानकों के पालन और प्रभावी रीसाइक्लिंग प्रक्रिया के कार्यान्वयन में भी यह डिजिटल पहचान सहायक होगी।
मसौदा दिशा-निर्देशों के अनुसार देश में कुल लिथियम-आयन बैटरी की मांग का लगभग 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा विद्युत वाहन क्षेत्र से आता है जो कारखानों या अन्य गैर-ऑटोमोटिव उपयोगों की तुलना में कहीं अधिक है। इसी कारण कारखानों में उपयोग होने वाली 2 किलोवाट-घंटे से अधिक क्षमता वाली बैटरियों के लिए बीपीएएन लागू करने की सिफारिश होने के बावजूद प्रारंभिक चरण में ईवी बैटरियों को प्राथमिकता देने का प्रस्ताव रखा गया है।
इस बैटरी पैक आधार ढांचे को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड या एआईएस मानकों के पालन की सिफारिश की गई है जो ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स कमिटी के अंतर्गत आते हैं। मसौदा दिशा-निर्देशों में इस कमिटी में बैटरी निर्माता, ईवी निर्माता, रीसाइक्लर, परीक्षण एजेंसियों और नियामक संस्थाओं के प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।