लेबनानः इस्लामाबाद में प्रस्तावित शांति वार्ता से ठीक पहले लेबनान में एक बार फिर इजरायली हमला हुआ है। शुक्रवार को दक्षिण लेबनान में हुए इस हमले में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में कम से कम 12 सुरक्षा कर्मी भी शामिल बताए जा रहे हैं। इस हमले के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है और हालात गंभीर बने हुए हैं।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच शुक्रवार को दक्षिणी लेबनान के नबातिह शहर में इजरायल ने बड़ा हवाई हमला किया। इस हमले में कम से कम 12 लेबनानी स्टेट सिक्योरिटी बल के जवानों की मौत हो गई। हमला एक सरकारी भवन के पास हुआ, जहां सुरक्षा कार्यालय को निशाना बनाया गया।
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे देश की संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है।
लगातार हमलों से बिगड़ते हालात
नबातिह के अलावा दक्षिण लेबनान के अन्य इलाकों में भी हमले किए गए हैं। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय और सरकारी मीडिया के मुताबिक, यह हाल के दिनों की सबसे गंभीर घटनाओं में से एक है।
इससे पहले 8 अप्रैल 2026 को हुए भीषण हमलों को ‘ब्लैक वेडनसडे’ कहा गया था, जब इजरायल ने पूरे लेबनान में 100 से अधिक ठिकानों पर एक साथ हवाई हमले किए थे। महज 10 मिनट में सैकड़ों बम गिराए गए थे। इन हमलों में 300 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जबकि 1,150 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। मार्च 2026 से अब तक कुल मृतकों की संख्या 1,800 के पार पहुंच चुकी है।
हिजबुल्लाह-इजरायल टकराव बना मुख्य कारण
क्षेत्र में बढ़ते तनाव के पीछे हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच जारी संघर्ष को मुख्य कारण माना जा रहा है। इजरायल का कहना है कि वह हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बना रहा है, जबकि लेबनान इसे अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन बता रहा है। लगातार हो रहे हमलों के चलते हजारों लोग बेघर हो चुके हैं और खाद्य संकट भी गहराता जा रहा है।
शांति वार्ता पर खतरा, ईरान की चेतावनी
इन हमलों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुरू होने वाली है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देशों ने दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति जताई है।
हालांकि, लेबनान पर जारी हमलों को लेकर ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर यह नहीं रुके तो वार्ता प्रभावित हो सकती है। वार्ता में हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय शांति जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
लेबनान में ताजा हमलों ने न केवल क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है, बल्कि शांति वार्ता की संभावनाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत से ही मध्य पूर्व की दिशा तय हो सकती है।