लखनऊ: लखनऊ में इको गार्डन पर बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी एकत्र हुए और आवारा कुत्तों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने एएनआई से बातचीत में शीर्ष अदालत से अपने निर्देश पर पुनर्विचार करने और अधिक मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।
रविवार को एएनआई से बात करते हुए एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को अपना आदेश वापस लेकर उसमें संशोधन करना चाहिए और वैज्ञानिक व व्यावहारिक समाधान अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आवारा कुत्तों के लिए पर्याप्त शेल्टर नहीं हैं और रेबीज़ जैसी बीमारियां कुत्तों की वजह से नहीं बल्कि टीकाकरण की कमी के कारण फैलती हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सुप्रीम कोर्ट से एक सरल अपील है "कृपया अपने आदेश को वापस लें और उस पर पुनर्विचार करें। ऐसा आदेश दीजिए जो वैज्ञानिक और मानवीय हो तथा ज़मीनी स्तर पर लागू किया जा सके। जब शेल्टर ही नहीं हैं, तो कुत्तों को रखा कहां जाएगा? आपने टीकाकरण नहीं कराया और कह रहे हैं कि डॉग बाइट से रेबीज़ फैलता है। इसमें जानवरों की क्या गलती है?… हम नहीं चाहते कि ये जानवर सड़कों पर पीड़ा सहें लेकिन उन्हें हटाने का तरीका मानवीय होना चाहिए।”
एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार एक अन्य प्रदर्शनकारी ने मांग की कि अदालत ऐसा आदेश दे जिससे कुत्ते और इंसान बिना डर के साथ रह सकें। उन्होंने कहा कि समाज ऐसा होना चाहिए जहां इंसान और जानवर समान रूप से सह-अस्तित्व में रह सकें। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि अदालत अपना फैसला वापस ले और अगर कुत्तों को लेकर कोई निर्णय लेना है, तो ऐसा आदेश दे जिससे वे हमारे साथ सुरक्षित माहौल में रह सकें। ऐसा समाज बने जहां इंसान और जानवर साथ रह सकें। जानवरों के लिए भी समानता होनी चाहिए। हम उनके अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं ताकि ऐसी स्थिति दोबारा न आए।
इस बीच, भाजपा नेता मेनका गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आलोचना करते हुए इसे देश के लिए हानिकारक बताया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पूरे भारत में नफरत का माहौल बना दिया है। जजों ने लोगों को इस आधार पर बांट दिया कि कौन किसी जानवर से प्यार करता है और कौन नफरत। यह भारत के साथ अन्याय है। पशु कल्याण अधिनियम एक अच्छा कानून है। इसे हटाया नहीं गया है, लेकिन उसके खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही है, जो गलत है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं का हवाला देते हुए राज्यों को अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, खेल परिसरों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया था। यह आदेश 22 अगस्त को तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जारी किया था, जिसमें 11 अगस्त के पहले आदेश में संशोधन किया गया।
22 अगस्त के आदेश के तहत, नसबंदी और टीकाकरण के बाद आवारा कुत्तों को उसी क्षेत्र में छोड़ा जाना है, सिवाय रेबीज़ से ग्रस्त या आक्रामक कुत्तों के। अदालत ने सार्वजनिक रूप से कुत्तों को खाना खिलाने पर भी रोक लगाई और नगर निकायों को हर वार्ड में निर्धारित फीडिंग ज़ोन बनाने का निर्देश दिया। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की बात भी कही गई। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया है। 11 अगस्त का आदेश केवल दिल्ली-एनसीआर तक सीमित था, जिसमें दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद से सभी आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया गया था।