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बोत्सवाना से आ रहे हैं 8 और चीते, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की घोषणा

28 फरवरी तक चीते भारत पहुंचेंगे।

By कौशिक दत्त, Posted by: प्रियंका कानू

Feb 05, 2026 12:20 IST

भोपाल: वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी है। दक्षिणी अफ्रीकी देश बोत्सवाना से 8 और चीते भारत लाए जा रहे हैं। इन चीतों को मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा जाएगा। बुधवार को यह जानकारी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दी। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट चीता के तहत बोत्सवाना से 8 चीते लाने की योजना बनाई गई है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ बैठक के बाद इस विषय पर निर्णय लिया गया। बैठक में चीतों को लाने की पूरी रूपरेखा तय की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 28 फरवरी के भीतर ही चीते भारत पहुंच जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि चीतों को मध्य प्रदेश लाने के पीछे का उद्देश्य राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में विशाल संरक्षित वन क्षेत्र मौजूद हैं, जिनका उपयोग कर पर्यटन विकास की व्यापक योजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही असम सहित अन्य राज्यों से जंगली भैंस लाने के विषय पर भी केंद्रीय वन मंत्री के साथ चर्चा हुई है। वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, चीतों के आने के बाद उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।


कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीता X


गौरतलब है कि एक समय भारत से चीते विलुप्त हो गए थे। बाद में चीतों को दोबारा भारत में बसाने की पहल शुरू की गई। इसी उद्देश्य से वर्ष 2022 में प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत हुई। इस परियोजना के तहत दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से चीते लाकर कूनो राष्ट्रीय उद्यान में रखा जा रहा है। सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री द्वारा नामीबिया से लाए गए 8 चीतों को कूनो में छोड़ा गया था। इसके बाद वहीं 19 शावकों का जन्म हुआ। फिलहाल भारत में कुल चीतों की संख्या 30 है, जिनमें से 12 वयस्क हैं।

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष दिसंबर में कूनो राष्ट्रीय उद्यान में दो चीता शावकों को जंगल में छोड़ा गया था। इसके एक दिन बाद ही एक शावक की मृत्यु हो गई थी। जंगल में छोड़े जाने के बाद 10 महीने का वह शावक अपनी मां से अलग हो गया था। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, चीतों की संख्या बढ़ाने के लिए कूनो राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन कई नए कदम उठा रहा है। भविष्य में गांधी सागर अभयारण्य में भी चीतों को छोड़ने की योजना बनाई जा रही है।

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