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नीतीश कुमार को भारत रत्न की मांग पर जेडीयू में अलग-अलग सुर, पार्टी ने किया खुद को अलग

केसी त्यागी के बयान को राजीव रंजन ने बताया व्यक्तिगत राय, कहा-पार्टी गतिविधियों से कोई संबंध नहीं।

By श्वेता सिंह

Jan 10, 2026 18:30 IST

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग को लेकर जनता दल (यूनाइटेड) के भीतर मतभेद के संकेत सामने आए हैं। जेडीयू नेता केसी त्यागी द्वारा यह मांग उठाए जाने के बाद पार्टी नेता राजीव रंजन प्रसाद ने साफ किया है कि इस बयान का पार्टी की आधिकारिक गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं है और यह पूरी तरह व्यक्तिगत राय है।

राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पूरी तरह स्वस्थ हैं और लगातार राज्य की जनता की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केसी त्यागी का बयान उनके निजी विचार हैं और पार्टी का उससे कोई संबंध नहीं है। जेडीयू नेतृत्व ने इस मुद्दे पर दूरी बनाकर यह संकेत देने की कोशिश की है कि पार्टी फिलहाल किसी सम्मान की मांग को राजनीतिक एजेंडा नहीं बना रही है।

इससे पहले शुक्रवार को जेडीयू नेता केसी त्यागी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की थी कि नीतीश कुमार को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। उन्होंने कहा था कि नीतीश कुमार समाजवादी आंदोलन से जुड़े सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे हैं और ‘सुशासन बाबू’ के रूप में उनकी पहचान है। त्यागी ने यह भी कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने पहले चौधरी चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देकर समाजवादी परंपरा का सम्मान किया है, जिसके लिए वे आभार व्यक्त करते हैं।

भारत रत्न को लेकर हाल के वर्षों में केंद्र सरकार के फैसलों का जिक्र करते हुए यह बहस और तेज हो गई है। फरवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और पीवी नरसिम्हा राव के साथ-साथ हरित क्रांति के जनक एम.एस. स्वामीनाथन को भारत रत्न देने की घोषणा की थी। वहीं जनवरी 2024 में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के लिए उनके आजीवन योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केसी त्यागी की मांग जहां नीतीश कुमार की समाजवादी विरासत और राष्ट्रीय भूमिका को रेखांकित करती है, वहीं जेडीयू नेतृत्व की ओर से तुरंत दूरी बनाना यह दर्शाता है कि पार्टी फिलहाल इस मुद्दे को औपचारिक राजनीतिक मांग के रूप में आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। यह घटनाक्रम जेडीयू के भीतर रणनीतिक संतुलन और केंद्र के साथ रिश्तों को साधने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

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