🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

कुर्सी एक, दावेदार कई-कौन होगा बिहार का नया मुख्यमंत्री?

दिल्ली में मंथन तेज, नीतीश कुमार के फैसले से बदलेंगे सत्ता के समीकरण। सीएम की रेस में सबसे आगे इनके नाम।

By श्वेता सिंह

Apr 09, 2026 14:23 IST

पटना/नई दिल्लीः बिहार की राजनीति इन दिनों तेज हलचल के दौर से गुजर रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और संभावित इस्तीफे की चर्चाओं ने सत्ता परिवर्तन की अटकलों को हवा दे दी है। जैसे-जैसे उनका दिल्ली दौरा और शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात का कार्यक्रम सामने आ रहा है, वैसे-वैसे राज्य में अगले मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस गहराता जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, 14 अप्रैल को इस्तीफा और 15 अप्रैल को नई सरकार के शपथ ग्रहण की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

दिल्ली में तय हो सकता है नया चेहरा

बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार 9 अप्रैल को दिल्ली पहुंचेंगे और 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इसके बाद उनकी मुलाकात अमित शाह समेत भाजपा के शीर्ष नेताओं से हो सकती है।

इन बैठकों में बिहार के नए मुख्यमंत्री, डिप्टी सीएम और मंत्रिमंडल के स्वरूप पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। माना जा रहा है कि यहीं पर अंतिम सहमति बन सकती है।

दावेदारों की लंबी सूची, समीकरण जटिल

मुख्यमंत्री पद की रेस में कई नाम सामने आ रहे हैं। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। इसके अलावा विजय कुमार सिन्हा, संजय सरावगी समेत अन्य नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। इन सभी चेहरों के बीच संतुलन बनाना एनडीए के लिए बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि हर दावेदार अपने साथ अलग सामाजिक और राजनीतिक समीकरण लेकर आता है।

गठबंधन धर्म और अंदरूनी रणनीति

इस पूरे घटनाक्रम के बीच नितिन नवीन ने कहा है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर किसी तरह का मतभेद नहीं है और सभी फैसले तय कार्यक्रम के अनुसार ही लिए जाएंगे। उन्होंने यह भी दोहराया कि भाजपा ने हमेशा गठबंधन धर्म का पालन किया है और सभी अहम फैसले अब भी नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही हो रहे हैं।

यह बयान इस बात का संकेत देता है कि एनडीए अंदरूनी मतभेदों को सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने देना चाहता।

आखिरी वक्त में बदल सकते हैं समीकरण

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार की सियासत में आखिरी क्षण तक कुछ भी तय नहीं माना जा सकता। दिल्ली में होने वाली बैठकों के बाद ही तस्वीर साफ होगी और संभव है कि अंतिम समय में कोई नया नाम सामने आकर सबको चौंका दे।

फिलहाल, सबकी निगाहें 14 और 15 अप्रैल की संभावित तारीखों पर टिकी हैं। अगर घटनाक्रम तय योजना के अनुसार आगे बढ़ता है, तो बिहार को जल्द ही नया मुख्यमंत्री मिल सकता है।

एक बात साफ है-कुर्सी एक है, दावेदार कई। अब देखना यह है कि सत्ता का ताज आखिर किसके सिर सजता है और बिहार की राजनीति किस नए दौर में प्रवेश करती है।

Articles you may like: