कोलकाता : मुकुल चौधरी ने आईपीएल में अपनी दमदार बल्लेबाजी से सभी को प्रभावित किया है लेकिन उनकी इस सफलता के पीछे संघर्ष से भरी एक लंबी कहानी छिपी है। कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ खेले गए मुकाबले में उन्होंने 27 गेंदों पर नाबाद 54 रन बनाए जिसमें 7 छक्के और 2 चौके शामिल थे। यह पारी सिर्फ एक शानदार प्रदर्शन नहीं बल्कि उनके वर्षों के संघर्ष का परिणाम है।
मुकुल के पिता दलिप चौधरी अक्सर एक कविता की पंक्तियां दोहराते हैं जो उनके जीवन की सच्चाई को दर्शाती हैं। उनका मानना है कि सफलता एक दिन में नहीं मिलती बल्कि इसके लिए लंबे समय तक कठिन मेहनत करनी पड़ती है। मुकुल का बचपन भी बेहद मुश्किलों में बीता। आर्थिक तंगी, अच्छी क्रिकेट अकादमी की कमी और कर्ज का बोझ इन सभी चुनौतियों का सामना उन्होंने और उनके परिवार ने किया। यहां तक कि उनके पिता को एक समय जेल भी जाना पड़ा।
राजस्थान के झुंझुनूं जैसे छोटे इलाके से निकलकर मुकुल ने अपने सपनों को जिंदा रखा। उनके पिता ने बेटे को क्रिकेटर बनाने के लिए अपना घर तक बेच दिया और कई कठिनाइयों का सामना किया। लोगों ने उन्हें पागल तक कहा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ एक मैच में मुकुल अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए थे। उस मैच के बाद वह भावुक हो गए थे और अपने पिता से वादा किया कि अगले मैच में बेहतर प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने अपना वादा निभाया और शानदार पारी खेलकर टीम को जीत दिलाई।
आईपीएल में उन्हें लखनऊ सुपर जायंट्स ने 2.6 करोड़ रुपये में खरीदा। मौके मिलने पर उन्होंने खुद को साबित किया। इस सफलता का श्रेय उन्होंने अपने पिता को दिया जिन्होंने पहले ही तय कर लिया था कि उनका बेटा क्रिकेटर बनेगा।
मुकुल अपने आदर्श महेंद्र सिंह धोनी से प्रेरणा लेते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने धोनी से सीखा है कि कैसे दबाव में भी शांत रहकर मैच खत्म किया जाता है।
ईडन गार्डन्स में खेली गई इस पारी ने मुकुल को एक नई पहचान दी। यह कहानी मेहनत, त्याग और अटूट विश्वास की मिसाल है।