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वर्ल्ड कप विवाद: ‘भारत भी बांग्लादेश के बॉयकाट के पक्ष में नहीं था’, BCB अध्यक्ष का दावा

ICC बैठक के तुरंंत बाद बांग्लादेश के अमीनुल इस्लाम बुलबुल का बयान, BCCI ने सार्वजनिक रूप से फैसले का किया समर्थन।

By नबीन पाल, Posted by: श्वेता सिंह

Feb 11, 2026 20:39 IST

ढाका/नई दिल्ली: इस वर्ष के T20 वर्ल्ड कप की शुरुआत से पहले जिस विवाद ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को हिला दिया था, वह टूर्नामेंट के समापन के करीब फिर चर्चा में आ गया है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम बुलबुल ने दावा किया है कि ICC की बैठक में कई सदस्य देश बांग्लादेश को वर्ल्ड कप से बाहर किए जाने के पक्ष में नहीं थे-यहां तक कि भारत भी नहीं चाहता था कि बांग्लादेश को बाहर किया जाए। बुलबुल का यह बयान बांग्लादेशी मीडिया संस्थान ‘प्रोथोम आलो’ को दिए गए एक इंटरव्यू में सामने आया है।

विवाद कैसे शुरू हुआ?

मामले की शुरुआत तब हुई जब बांग्लादेश ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा मुस्तफिजुर रहमान को IPL से बाहर रखने का विरोध किया। इसके बाद बांग्लादेश ने भारत में आयोजित होने वाले वर्ल्ड कप का बहिष्कार (बॉयकॉट) करने का निर्णय लिया।

ICC ने बांग्लादेश को कई अवसर दिए ताकि वह अपने फैसले पर पुनर्विचार कर सके, लेकिन बोर्ड अपने रुख पर कायम रहा। अंततः ICC ने मतदान कर बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर करने का फैसला लिया और उसकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल कर लिया।

ICC बैठक का नतीजा क्या निकला?

अमीनुल इस्लाम बुलबुल के अनुसार, ICC की बैठक में कई देशों ने यह राय रखी थी कि यदि बांग्लादेश अंतिम समय तक भी भाग लेने को तैयार नहीं होता, तो उसकी जगह किसी अन्य टीम को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। कुछ प्रतिनिधियों ने यहां तक सुझाव दिया कि जरूरत पड़ने पर वॉकओवर दे दिया जाए।

बुलबुल का दावा है कि भारत भी उन देशों में शामिल था जो बांग्लादेश को बाहर किए जाने के पक्ष में नहीं थे। उनका कहना है कि जब स्कॉटलैंड का नाम प्रस्तावित हुआ, तब भी भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधि बांग्लादेश का अंतिम क्षण तक इंतजार करने के पक्षधर थे।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि बांग्लादेश नहीं खेलता, तो पाकिस्तान सख्त रुख अपना सकता था और मैच खेलने से इनकार कर सकता था। हालांकि बुलबुल ने यह भी दावा किया कि यह स्थिति ICC और विश्व क्रिकेट के लिए बेहद नुकसानदेह होती।

ICC ने आखिरी फैसला कैसे लिया?

हालांकि इन दावों के बावजूद, जब ICC ने बांग्लादेश को बाहर करने के प्रस्ताव पर मतदान कराया, तो बांग्लादेश के खिलाफ अधिक मत पड़े। बहुमत के आधार पर उसे टूर्नामेंट से बाहर करने का निर्णय लिया गया।

BCCI ने इस पूरे घटनाक्रम पर सार्वजनिक रूप से कोई अलग बयान जारी नहीं किया। उसने स्पष्ट कहा कि वह ICC के फैसले का समर्थन करता है। इस प्रकार, आधिकारिक तौर पर भारत ने बांग्लादेश को बाहर करने और स्कॉटलैंड को शामिल करने के निर्णय का समर्थन किया।

सरकार ने या फिर टीम ने किया था बॉयकाट?

बांग्लादेश के वर्ल्ड कप में न जाने के फैसले को लेकर देश के भीतर भी मतभेद सामने आए। सरकार ने प्रारंभ में कहा था कि भारत न जाने का निर्णय सुरक्षा कारणों से लिया गया था। बाद में बयान बदला गया और कहा गया कि यह फैसला क्रिकेट बोर्ड और खिलाड़ियों पर निर्भर था।

हालांकि, कई खिलाड़ियों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि इस महत्वपूर्ण निर्णय में उनसे कोई परामर्श नहीं किया गया। उन्हें केवल अंतिम निर्णय की जानकारी दी गई।

दूसरी ओर, अमीनुल इस्लाम बुलबुल ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय सरकार का था और उन्होंने उस फैसले का समर्थन किया।

बांग्लादेश के लिए सजा-बड़ी या छोटी?

बुलबुल का कहना है कि ICC ने उतनी कठोर सजा नहीं दी, जितनी आशंका जताई जा रही थी। फिर भी, विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ल्ड कप जैसे वैश्विक मंच से बाहर होना बांग्लादेश क्रिकेट के लिए एक गंभीर झटका है-चाहे वह खेल की प्रतिष्ठा हो, खिलाड़ियों का मनोबल या अंतरराष्ट्रीय छवि। हर तरह से इस फैसले का खामियाजा बंग्लादेश को ही झेलना होगा।

वर्ल्ड कप का शोर थमने के बाद अब यह विवाद फिर सुर्खियों में है। बुलबुल के बयान ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि ICC की उस बैठक में वास्तव में क्या हुआ था-और क्या कूटनीतिक स्तर पर कुछ और चल रहा था, जो सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया।

फिलहाल, आधिकारिक रिकॉर्ड यही दर्शाता है कि मतदान के आधार पर बांग्लादेश को बाहर किया गया और स्कॉटलैंड को अवसर मिला। हालांकि यह विवाद आने वाले समय में भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।

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