चंडीगढ़ : ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क ने सोमवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से चंडीगढ़ में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्य में क्रिकेट के विकास में योगदान देने की इच्छा जताई और भविष्य में एक क्रिकेट अकादमी स्थापित करने की संभावना पर भी चर्चा की।
माइकल क्लार्क ने मुख्यमंत्री आवास ‘संत कबीर कुटीर’ का दौरा किया। मुलाकात के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ क्रिकेट भी खेला और खेल के प्रति उनके उत्साह की सराहना की।
इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के समापन के बाद भारत में मौजूद क्लार्क इन दिनों भारत और अफगानिस्तान के बीच खेले जा रहे टेस्ट मैच में कमेंट्री की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में माइकल क्लार्क ने कहा, “मैंने मुख्यमंत्री को एक गेंद फेंकी और उन्होंने उस पर छक्का जड़ दिया। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं। इंडियन प्रीमियर लीग अभी समाप्त हुई है और मैं अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच में कमेंट्री करने के लिए यहां हूं। ऐसे में मुख्यमंत्री से मिलना मेरे लिए सम्मान की बात है। खेल के प्रति उनका प्रेम और जुनून बेहद प्रेरणादायक है।”
उन्होंने आगे कहा कि मुझे उम्मीद है कि हम हरियाणा से और भी बेहतर क्रिकेटर तैयार कर पाएंगे। मैं यहां अधिक समय बिताना चाहता हूं और संभव हो तो अपनी क्रिकेट अकादमी भी स्थापित करना चाहूंगा। साथ ही कुछ युवा ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को भारत लाना और भारतीय खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया भेजना भी मेरी योजना का हिस्सा हो सकता है।”
माइकल क्लार्क ऑस्ट्रेलिया के सबसे सफल बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। उन्होंने 115 टेस्ट मैचों में 8,643 रन बनाए, जिसमें 28 शतक शामिल हैं। इस उपलब्धि के साथ वह ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख टेस्ट रन बनाने वाले बल्लेबाजों में शामिल हैं।
एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी उनका रिकॉर्ड शानदार रहा। उन्होंने 7,981 रन बनाए और आज भी ऑस्ट्रेलिया के सर्वकालिक सर्वाधिक रन बनाने वाले एकदिवसीय बल्लेबाजों की सूची में चौथे स्थान पर हैं।
क्लार्क ने वर्ष 2004 में बेंगलुरु में भारत के खिलाफ अपने टेस्ट पदार्पण मैच में 151 रन की शानदार पारी खेलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जोरदार पहचान बनाई थी।
इसके बाद 2011-12 की श्रृंखला के दौरान सिडनी क्रिकेट मैदान पर भारत के खिलाफ नाबाद 329 रन बनाकर वह टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले ऑस्ट्रेलिया के छठे बल्लेबाज बने थे।
वर्ष 2011 में उन्होंने रिकी पोंटिंग की जगह ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम की कप्तानी संभाली। उनकी कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया ने 2013-14 की एशेज श्रृंखला में इंग्लैंड को 5-0 से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
इसके अलावा, क्लार्क ने वर्ष 2015 में ऑस्ट्रेलिया को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद क्रिकेट विश्व कप का खिताब भी दिलाया। उसी वर्ष उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया।
बल्लेबाजी के अलावा उनकी बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी भी कई मौकों पर टीम के लिए उपयोगी साबित हुई। वर्ष 2008 में भारत के खिलाफ 3 विकेट पर केवल 5 रन देकर उन्होंने मैच का रुख बदल दिया था, जिससे ऑस्ट्रेलिया ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी अपने पास बरकरार रखी थी।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में माइकल क्लार्क के नाम कुल 94 विकेट भी दर्ज हैं, जो उनकी हरफनमौला क्षमता को दर्शाते हैं।