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भारत की नाक के नीचे ईरानी युद्धपोत को अमेरिकी टॉरपीडो ने डुबोया, क्या ट्रम्प भारत के बंदरगाहों का इस्तेमाल कर रहे हैं? विदेश मंत्रालय का जवाब

विदेश मंत्रालय का कड़ा जवाब- फर्जी रिपोर्टों को सख्त शब्दों में खारिज।

नयी दिल्लीः बुधवार को भारत से सैन्य अभ्यास पूरा कर लौटते समय हिंद महासागर में ईरान की नौसेना के युद्धपोत ‘आईआरआईएस डेना’ पर अमेरिका की एक पनडुब्बी ने हमला किया। टॉरपीडो दागकर युद्धपोत को नष्ट कर दिया गया। इस घटना में कम से कम 87 लोगों की मौत होने की खबर है।

इसके बाद सवाल उठने लगे कि क्या ईरान पर सैन्य हमले के लिए भारतीय बंदरगाहों का इस्तेमाल किया जा रहा है?कुछ अंतरराष्ट्रीय समाचार माध्यमों में भी ऐसा दावा किया गया।

हालांकि भारत सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। साउथ ब्लॉक स्थित विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया कि ये दावे पूरी तरह झूठे और भ्रामक हैं तथा इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

हाल ही में अमेरिकी समाचार माध्यम वन अमेरिका न्यूज़ नेटवर्क को दिए एक साक्षात्कार में अमेरिकी सेना के सेवानिवृत्त कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने दावा किया था कि ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई में अमेरिका भारत के कुछ बंदरगाहों या नौसैनिक अड्डों का उपयोग कर रहा है।

उनके बयान के सार्वजनिक होते ही यह जानकारी सामाजिक माध्यमों पर तेजी से फैल गई और इस पर तरह-तरह की अटकलें शुरू हो गईं। इसी बीच विशाखापत्तनम से लौटते समय हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत पर अमेरिकी हमले की खबर ने इन अटकलों को और हवा दे दी।

अमेरिका को युद्ध में मदद देने के दावों के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत के बंदरगाहों का उपयोग कर अमेरिका द्वारा ईरान पर हमला करने की बात पूरी तरह झूठी है।

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत की भूमि या बंदरगाह किसी भी विदेशी देश के सैन्य अभियान के लिए इस्तेमाल नहीं किए जा रहे हैं।

साथ ही सरकार ने चेतावनी दी कि जब अंतरराष्ट्रीय हालात तनावपूर्ण होते हैं, तब इस तरह की गलत जानकारी या अफवाहें तेजी से फैलती हैं। इसलिए ऐसी खबरें फैलाने से पहले तथ्यों की जांच करना जरूरी है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय संघर्ष के समय फर्जी खबरें कूटनीतिक संबंधों पर भी असर डाल सकती हैं।


पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इज़राइल को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान द्वारा दुबई, कुवैत और ओमान सहित कई स्थानों पर लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरों ने वैश्विक राजनीति में चिंता बढ़ा दी है।

इस पृष्ठभूमि में विभिन्न देश अपने-अपने कूटनीतिक रुख स्पष्ट कर रहे हैं। भारत हमेशा से पश्चिम एशिया के देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की नीति अपनाता आया है।

एक ओर भारत के ईरान के साथ ऊर्जा और व्यापारिक संबंध हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका और इज़राइल के साथ भी रणनीतिक सहयोग है। इसलिए इस तरह के आरोप सामने आते ही भारत सरकार ने तुरंत उन्हें खारिज करते हुए साफ संदेश दिया कि भारत की भूमि को किसी आक्रामक सैन्य कार्रवाई के आधार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों में फर्जी सूचना या गलत व्याख्या आसानी से अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ा सकती है। इसी कारण भारत सरकार ने तुरंत इस दावे को नकारते हुए अपना रुख स्पष्ट किया।

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