वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल वेनेजुएला की स्थिति अमेरिका ही नियंत्रित करेगा। फ्लोरिडा में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में ट्रम्प ने कहा कि जब तक वहां सत्ता का सुरक्षित और सुचारू हस्तांतरण नहीं होता, तब तक अमेरिका ही देश की व्यवस्था संभालेगा।
उन्होंने यह नहीं बताया कि नियंत्रण कैसे होगा, केवल यह कहा गया कि इस काम के लिए एक विशेष टीम तैनात होगी। ट्रम्प के शब्दों से यह भी संकेत मिला कि संभवतः अमेरिकी सेना को वहां तैनात किया जा सकता है।
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की ट्रम्प द्वारा तारीफ
ट्रम्प ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की तारीफ करते हुए इसे इतिहास में अद्वितीय बताया। उनके अनुसार, बहुत ही कम समय में वेनेजुएला की सभी सैन्य शक्तियां निष्क्रिय हो गईं। उन्होंने कहा कि नौसेना, वायु सेना और पैदल सेना को संयुक्त रूप से कार्य में लगाया गया और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इस तरह की कार्रवाई पूरे विश्व में नहीं देखी गई। ट्रम्प के बयान से यह भी संकेत मिलता है कि वेनेजुएला में अमेरिका की सैन्य ताकत पूरी तरह सक्रिय है।
तेल संसाधन और निवेश पर नजर
ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका हमेशा से वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर नजर रखता रहा है। उन्होंने बताया कि विश्व की बड़ी तेल कंपनियां अमेरिका से वेनेजुएला जाएंगी, वहां भारी निवेश करेंगी, पुराने ढांचे सुधारेंगी और देश के लिए आर्थिक लाभ पैदा करेंगी।
इससे पहले ही अमेरिका ने वेनेजुएला में तेल टैंकरों के संचालन पर रोक लगा दी थी। सीमावर्ती क्षेत्रों में तेल टैंकरों की आवाजाही पर पाबंदी लागू है।
विश्व प्रतिक्रिया: मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
अमेरिका की इस कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया मिश्रित रही है। ब्रिटेन ने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई में उनका कोई संबंध नहीं है। यूरोपीय संघ ने मादुरो सरकार पर नज़र रखते हुए शांतिपूर्ण समाधान की अपील की। चीन ने अमेरिका की कार्रवाई की कड़ी निंदा की और कहा कि अमेरिका ने एक संप्रभु राष्ट्र के खिलाफ बल प्रयोग किया और यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
अमेरिका का कदम और वैश्विक राजनीति
ट्रम्प की यह घोषणा वैश्विक राजनीति में सवाल और बहस का विषय बन गई है। अमेरिका ने वेनेजुएला की स्थिति पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से नियंत्रण जताया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका का यह कदम लंबे समय तक वैश्विक तेल बाजार और दक्षिण अमेरिकी राजनीति पर असर डालेगा।