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वेतन में असमानता: मंत्री से हस्तक्षेप करने की मांग कर रहे प्राथमिक शिक्षक

ट्रेनिंग के पैसे को लेकर फंसा मामला, हजारों शिक्षक इंतजार में।

By स्नेहाशीष नियोगी, Posted by: श्वेता सिंह

Jan 04, 2026 22:51 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल में प्राथमिक शिक्षकों के वेतन को लेकर असमानता का मुद्दा फिर सामने आया है। एक साल की ट्रेनिंग लेकर नौकरी पाने वाले हजारों शिक्षक आज भी अपने हक की राशि से वंचित हैं और अब उन्होंने शिक्षा मंत्री से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है।

नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) के नियमों के मुताबिक 3 सितंबर 2001 के बाद प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए दो साल का PTI या D.El.Ed प्रशिक्षण जरूरी है। लेकिन वाम सरकार के दौर में बड़ी संख्या में युवाओं को केवल एक साल की ट्रेनिंग के आधार पर शिक्षक के रूप में नियुक्ति दी गई थी।

बाद में कई शिक्षकों ने NCTE की छूट और सरकार की पहल के तहत एक साल का अतिरिक्त D.El.Ed प्रशिक्षण भी पूरा किया। इसे ध्यान में रखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने 4 सितंबर 2024 को एक आदेश जारी किया था। इस आदेश में कहा गया कि 3 मार्च 2013 से पहले एक साल की ट्रेनिंग लेकर नौकरी पाने वाले शिक्षकों से कोई पैसा वापस नहीं लिया जाएगा और सभी को ट्रेनिंग का पूरा लाभ मिलेगा।

इसके बावजूद 2010 के बाद और 3 मार्च 2013 से पहले नियुक्त हुए कई शिक्षक-शिक्षिकाओं को ट्रेनिंग का पैसा सरकारी खजाने में लौटाने के लिए मजबूर किया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि करीब 20 हजार शिक्षक 30 से 40 हजार रुपये की राशि से वंचित रह गए।

दिलचस्प बात यह है कि 1 जनवरी 2006 से 2010 के बीच नियुक्त प्राथमिक शिक्षकों को एक साल की ट्रेनिंग होने के बावजूद कोई पैसा वापस नहीं करना पड़ा। इसी आधार पर 2010 से 2013 के बीच नियुक्त शिक्षकों ने भी समान सुविधा देने की मांग करते हुए शिक्षा विभाग में आवेदन किया था।

शिक्षकों का आरोप है कि आवेदन दिए काफी समय हो गया, लेकिन विकास भवन से अब तक कोई जवाब नहीं आया है। विभागीय लापरवाही के कारण न तो उन्हें पैसा वापस मिला और न ही कोई स्पष्ट निर्णय लिया गया।

इस स्थिति को देखते हुए पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से भीमसेन बिस्वाल ने शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु से हस्तक्षेप करने की मांग की है। संघ का कहना है कि अगर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो हजारों शिक्षक अपने जायज हक से वंचित रह जाएंगे।

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