नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुआ। हाल के सत्रों में भारत–अमेरिका ट्रेड डील को लेकर बनी सकारात्मक धारणा के बाद आई तेजी पर मुनाफावसूली हावी रही। इसके साथ ही वैश्विक संकेतों के कमजोर होने से भी निवेशकों का उत्साह ठंडा पड़ा और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में फिसल गए।
बीएसई सेंसेक्स 503.76 अंक यानी 0.60 प्रतिशत की गिरावट के साथ 83,313.93 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 133.20 अंक या 0.52 प्रतिशत टूटकर 25,642.80 पर आ गया।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर ने कहा कि भारतीय इक्विटी बाजारों में कंसोलिडेशन का दौर देखने को मिला। उनके अनुसार, हालिया सत्रों में कमजोरी के बाद तेज उछाल आया था, जो मुख्य रूप से भारत–अमेरिका ट्रेड डील को लेकर आशावाद से प्रेरित था। ऐसे में आज मुनाफावसूली स्वाभाविक रही।
उन्होंने बताया कि वैश्विक कारकों ने भी बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में टेक शेयरों में संभावित व्यापक बिकवाली की चिंता और अमेरिका–ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी। इस दौरान मेटल और स्मॉल-कैप शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखी गई, जबकि व्यापक सूचकांकों में सतर्क कारोबार का माहौल रहा।
बाजार की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक पर टिकी हुई है, जिसका फैसला शुक्रवार को आएगा। विनोद नायर के मुताबिक, भारत की आर्थिक विकास संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं और बाजार की आम राय यही है कि ब्याज दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने दिसंबर में हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद भारत की मौजूदा आर्थिक स्थिति को “रेयर गोल्डीलॉक्स पीरियड” करार दिया था, जहां तेज आर्थिक विकास के साथ महंगाई बेहद निचले स्तर पर है। दिसंबर में संपन्न तीन दिवसीय एमपीसी समीक्षा बैठक के बाद आरबीआई ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती करते हुए इसे 5.25 प्रतिशत कर दिया था।