मुंबई : उथल-पुथल भरे शेयर बाजार में कभी ट्रंप के टैरिफ के झटके से कई शेयर गिरावट के निचले स्तर पर पहुंच जाते हैं। कभी सोना-चांदी रिटर्न में तूफान ला देते हैं। कभी फिर बॉन्ड (ऋणपत्र) निश्चित रिटर्न की उम्मीद जगाते हैं।
निवेश विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि में किसी भी निवेश को लाभदायक बनाने के लिए पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाइड (diversified portfolio) करना जरूरी है। यदि कई एसेट क्लास (Asset Class) में निवेश हो, तो किसी न किसी समय कोई न कोई अच्छा रिटर्न जरूर देगा, ऐसा विशेषज्ञ बताते हैं। लेकिन हर समय खुद हिसाब लगाकर निवेश करना संभव नहीं होता। ऐसे में क्या किया जाए?
अब म्यूचुअल फंड में निवेश करना आम आदमी के लिए सबसे आसान है। नियमित रूप से पैसा जमा करने की आदत बना ली जाए तो बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है, ऐसा कई जगह आश्वासन दिया जाता है। काफी समय से म्यूचुअल फंड की दुनिया में ऐसा फंड मौजूद है जो कई एसेट क्लास में निवेश करता है— उसका नाम है मल्टी एसेट एलोकेशन फंड या संक्षेप में MAAF।
ऐसा नाम क्यों?
मल्टी एसेट एलोकेशन यानी कई एसेट क्लास में निवेश— ऐसे फंड में यही होता है। अक्टूबर 2017 के SEBI Categorisation Circular के अनुसार, इस प्रकार के फंड में कम से कम 3 एसेट क्लास में निवेश करना अनिवार्य है और प्रत्येक एसेट क्लास में न्यूनतम 10 प्रतिशत निवेश होना चाहिए। इसलिए जो लोग खुद अपना पोर्टफोलियो व्यवस्थित नहीं कर पाते, उनके लिए यह फंड शुरुआती कदम बन सकता है।
एसेट क्लास का मतलब क्या है?
कहां निवेश किया जा रहा है, वही एसेट क्लास है। जैसे इक्विटी एक एसेट क्लास है। डेट (Debt) एक एसेट क्लास है। कीमती धातुएं जैसे सोना और चांदी भी एक एसेट क्लास हैं। इसलिए एक साथ कई प्रकार के एसेट क्लास में निवेश के लिए मल्टी एसेट फंड का उपयोग किया जा सकता है।
फायदे क्या हैं?
एक ही फंड में इतने प्रकार के एसेट में निवेश होता है और उस फंड की देखरेख एक फंड मैनेजर करता है। सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर सुजन दास बताते हैं कि खुद समझ पाना मुश्किल होता है कि कब और कहां निवेश करना सही होगा। इस तरह के फंड होने पर अलग से चिंता करने की जरूरत नहीं रहती। फंड मैनेजर यह काम करते हैं। इससे तुलनात्मक रूप से वोलैटिलिटी यानी जोखिम कम करने में मदद मिलती है।
कर संबंधी मामलों में भी एक फायदा माना जा सकता है, ऐसा सुजन दास का कहना है। उनके अनुसार यदि कोई अवसर देखकर इक्विटी फंड बेचकर पैसा डेट फंड में लगाए, या डेट फंड बेचकर पैसा इक्विटी या गोल्ड फंड में लगाए, तो हर बार उसे कैपिटल गेन टैक्स देना होगा। लेकिन मल्टी एसेट फंड में फंड मैनेजर जरूरत के अनुसार एसेट क्लास के बीच निवेश का संतुलन बदल सकते हैं। इससे अवसर का लाभ तो मिलेगा, लेकिन जब तक फंड नहीं बेचा जाता, तब तक टैक्स नहीं देना होगा।
अच्छे रिटर्न की संभावना :
पर्सनल फाइनेंस प्रैक्टिशनर नीलांजन डे बताते हैं कि इस तरह के फंड के इक्विटी हिस्से में ग्लोबल स्टॉक भी हो सकते हैं। साथ ही वे बताते हैं कि भले ही किसी विशेष एसेट क्लास में निवेश न हो, लेकिन कई एसेट क्लास में से किसी एक की ओर निवेश का झुकाव ज्यादा हो सकता है। अधिकांश मामलों में झुकाव इक्विटी की ओर ज्यादा रहता है।
नीलांजन डे कहते हैं कि पहली पंक्ति की सभी AMC के पास मल्टी एसेट एलोकेशन प्रोडक्ट मौजूद हैं। हाल ही में चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी गई थी, जिसकी वजह से कई मल्टी एसेट फंड के NAV में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। क्योंकि इन फंडों का चांदी में निवेश था। वे बताते हैं कि जिन फंड मैनेजरों ने पहले ही निवेश कर लिया था, उन्होंने बड़ा लाभ कमाया। और वह लाभ आम निवेशकों की जेब में गया। सोना-चांदी के रिटर्न ने अन्य एसेट क्लास की कमी की भरपाई कर दी।
हालांकि किसी भी म्यूचुअल फंड की तरह मल्टी एसेट क्लास में भी जोखिम मौजूद है। बाजार के किस हिस्से में जोखिम होगा, यह पहले से नहीं कहा जा सकता, ऐसा विशेषज्ञों का कहना है।
(समाचार एई समय कहीं भी निवेश की सलाह नहीं देता। शेयर बाजार या किसी भी क्षेत्र में निवेश जोखिम के अधीन है। निवेश से पहले उचित अध्ययन और विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। यह खबर केवल शैक्षिक और जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।)