शैडो फ्लीट से भारत में रूसी तेल भेजने का आरोप

यह तेल 30 जहाजों में आया है, जो नकली झंडे का उपयोग करके चलाए गए थे।

By रिनिका राय चौधरी, Posed by डॉ.अभिज्ञात

Nov 30, 2025 14:27 IST

नयी दिल्लीः चालू वर्ष के जनवरी से सितंबर तक भारत ने मास्को से लगभग 54 लाख टन कच्चा तेल आयात किया है, जिसकी आर्थिक कीमत लगभग 22 हजार करोड़ रुपये है। ऐसा सनसनीखेज दावा यूरोप की अनुसंधान संस्था सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) ने किया है। उसने अपनी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह तेल 30 जहाजों में आया है, जो नकली झंडे लगाकर चलाये गये थे।

रिपोर्ट के अनुसार, यह निर्यात रूस के बढ़ते तथाकथित 'शैडो फ्लीट' के माध्यम से भेजा गया है। रिपोर्ट में सीआरईए ने यह भी दावा किया है कि पूरी दुनिया में एकल देश के रूप में भारत में ही सबसे ज्यादा कच्चा तेल भेजा गया है। आरोप है कि यूक्रेन में रूसी सैन्य आक्रमण के बाद पश्चिमी देशों ने रूसी ईंधन आयात पर कड़े प्रतिबंध लगाए। उन प्रतिबंधों से बचने के लिए तेल निर्यात हेतु ही मास्को ने 'शैडो फ्लीट' जैसी वैकल्पिक रणनीति का सहारा लिया है। इस बेड़े के जहाज आमतौर पर बहुत पुराने टैंकर हैं, जिनकी पहचान करने वाली स्वचालित ट्रैकिंग व्यवस्था बंद रखी जाती है। इसलिए ये अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून को अंगूठा दिखाकर काम चलाते रहते हैं।

सीआरईए का दावा है कि इस तरह के जहाज का उपयोग करके रूस चीन, भारत और तुर्की जैसे देशों में प्रतिबंधों की अवहेलना करके तेल भेज रहा है। हेलसिंकी की इस अनुसंधान संस्था की जानकारी के अनुसार 2025 के पहले नौ महीनों में कुल 113 रूसी जहाजों ने फर्जी झंडे का उपयोग किया है। इन जहाजों के माध्यम से रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात का लगभग 13 प्रतिशत परिवहन हुआ है, जिसकी मात्रा लगभग 1 करोड़ 10 लाख टन है। और भी चिंताजनक जानकारी यह है कि पिछले साल के दिसंबर की तुलना में चालू वर्ष के सितंबर में फर्जी झंडाधारी 'शैडो' जहाजों की संख्या लगभग छह गुना बढ़कर 90 हो गई है। यह तेज वृद्धि विश्व ईंधन बाजार और समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर रही है।

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