मुंबई। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने शनिवार को कहा कि एयर इंडिया, जो परिवर्तन के दौर से गुजर रही है, टाटा समूह के लिए सिर्फ एक व्यावसायिक अवसर नहीं बल्कि एक “ज़िम्मेदारी” है। उन्होंने कहा कि एविएशन सेक्टर लगातार चुनौतियों का सामना कर रहा है और वैश्विक सप्लाई चेन संबंधी समस्याएं पार्ट्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और नए विमानों की उपलब्धता को काफी अनिश्चित बनाती हैं।
चंद्रशेखरन ने यहां टाटा समूह के संस्थापक जेआरडी टाटा की 121वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अपने मुख्य भाषण में कहा, “जब टाटा समूह ने 2022 में एयर इंडिया खरीदने का निर्णय लिया, तब कई लोगों ने मुझसे सार्वजनिक और निजी तौर पर पूछा-जब समूह अच्छा कर रहा है, तो एविएशन जैसे सेक्टर में क्यों उतर रहा है? लेकिन मेरा मानना है कि टाटा समूह के लिए एयर इंडिया सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदारी है।”
टाटा समूह ने जनवरी 2022 में घाटे में चल रही एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का अधिग्रहण किया और तब से पांच साल की एक महत्वाकांक्षी परिवर्तन योजना पर काम चल रहा है। हालांकि, वैश्विक सप्लाई चेन की समस्याओं के कारण विमान अपग्रेडेशन और डिलीवरी में देरी हुई जिससे प्रगति अपेक्षा से धीमी रही।
उन्होंने कहा, “GDP में हर एक प्रतिशत की वृद्धि घरेलू विमानन क्षेत्र को 2 प्रतिशत बढ़ाती है। यदि भारत 8 प्रतिशत की दर से बढ़ता है, तो एविएशन इंडस्ट्री 16 प्रतिशत बढ़ेगी। यह रुझान कम से कम तीन दशकों तक जारी रहेगा। यह आर्थिक विकास का बेहद रोमांचक चरण है-खासकर विमानन क्षेत्र के लिए। लेकिन यह आसान नहीं है।”
चंद्रशेखरन ने कहा कि वैश्विक सप्लाई चेन के कारण पार्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता अनिश्चित हो गई है, “जिससे हर योजना प्रभावित हो रही है।” उन्होंने यह भी कहा कि एविएशन एक अत्यधिक पूंजी-प्रधान व्यवसाय है और उद्योग के मार्जिन बहुत कम होते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत पहले ही चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और तीसरी बनने की ओर बढ़ रहा है। जुलाई–सितंबर तिमाही में 8.2% GDP वृद्धि “बेहतरीन” है। इस वित्त वर्ष में भारत कम से कम 7% की वृद्धि करेगा। बढ़ती उपभोक्ता मांग, खपत-आधारित विकास और सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी खर्च वृद्धि को और तेज करेगा। उन्होंने कहा, “भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा और इससे आगे जाएगा। हम हर अतिरिक्त ट्रिलियन डॉलर तेजी से जोड़ेंगे। लेकिन इसके लिए देश में कनेक्टिविटी का मजबूत होना आवश्यक है।”
चंद्रशेखरन ने कहा कि एविएशन उद्योग में कई पहलुओं का प्रबंधन करना पड़ता है-कुछ नियंत्रित किए जा सकते हैं, लेकिन कुछ पूरी तरह अप्रत्याशित होते हैं।
“जियोपॉलिटिक्स एक सरप्राइज है। अचानक उड़ानों के रूट बदलने पड़ते हैं, क्योंकि आप किसी क्षेत्र के ऊपर से उड़ान नहीं भर सकते। इससे उड़ानें लंबी होती हैं, ईंधन खर्च बढ़ता है… और हमें इन सबका प्रबंधन करना होता है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने बताया कि हवाई यात्रा की मांग बहुत अधिक है और भारतीयों की आकांक्षाएं तेजी से बढ़ रही हैं। “हमारी प्रतिबद्धता एक विश्वस्तरीय एयरलाइन बनाने की है,” उन्होंने कहा। उन्होंने कहा कि एयर इंडिया का घरेलू बेड़ा इस वर्ष के अंत तक पूरी तरह अपग्रेड हो जाना चाहिए तथा वाइड-बॉडी बेड़ा अगले कुछ वर्षों में रेट्रोफिट किया जाएगा। सप्लाई चेन विलंब के कारण यह काम पहले पूरा नहीं हो सका।
चंद्रशेखरन ने कहा, “अगले तीन वर्षों में हमें हर महीने नए विमान मिलने शुरू होंगे। तब हमारा लगभग 95% से 99% बेड़ा आधुनिक हो जाएगा। हम हर पहलू पर काम करेंगे-यह हमारा वादा है, लेकिन इसमें समय लगेगा”।